ब्रिटेन में बसे भारतीय मूल के हिन्दी लेखक प्राण शर्मा की दो गजलें-
1.
रहके अकेला इस दुनिया में करना सब कुछ हासिल प्यारे
मैं ही जानू कितना ज़्यादा होता है ये मुश्किल प्यारे
प्यारे-प्यारे, न्यारे-न्यारे खेल-तमाशे सब के सब हैं
आ कि ज़रा तुझको दिखलाऊँ दिल वालों की महफ़िल प्यारे
मोह नहीं जीवन का तुझको, मान लिया है मैंने लेकिन
दरिया में हर डूबने वाला चिल्लाता है साहिल प्यारे
कुछ तो चलो तुझको अनजानी राहों की पहचान हुई है
कैसा रंज, निराशा कैसी पा न सका जो मंजिल प्यारे
सबकी बातें सुनने वाले अपने दिल की बात कभी सुन
तेरी खैर मनाने वाला तेरा अपना है दिल प्यारे
कुछ तो कर महसूस खुशी को कुछ तो कर महसूस तसल्ली
कुछ तो आये मुँह पर रौनक कुछ तो हो दिल झिलमिल प्यारे
तेरे-मेरे रिश्ते-नाते ‘प्राण’ भला क्यों सारे टूटें
माना, तू मेरे नाकाबिल, मैं तेरे नाकाबिल प्यारे
2.
दोस्ती यूँ भी तेरी हम तो निभायेंगे
मानोगे जब तक नहीं तुझको मनायेंगे
सुनते हैं, बह जाती है सब मैल नफ़रत की
प्यार की गंगा में हम खुल कर नहायेंगे
कुछ भलाई जागी है हम में भी ए यारो
पंछियों को हम भी अब दाने खिलायेंगे
क्या हुआ जो बारिशों में ढह गयी यारो
राम ने चाहा कुटी फिर से बनायेंगे
हम फ़क़ीरों का ठिकाना हर जगह ही है
शहर से निकले तो जंगल ही बसायेंगे
आप जीवन में हमारे आके तो देखें
आपको दिल में कभी सर पर बिठायेंगे
एक से रहते नहीं दिन ‘प्राण’ जीवन के
आज रोते हैं अगर कल मुस्करायेंगे





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