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मैं अपनी कविता को माँ मानता हूँ : लीलाधर मंडलोई

लीलाधर मंडलोई

नई दिल्ली : ‘‘मेरी कविता के अनेक रूप मेरी माँ के ही विभिन्न रूप है। माँ से विलग होकर मैं मानो कोई कविता कह नहीं पाता, अतः मैं कविता को अपनी माँ ही मानता हूँ।’’ यह भावपूर्ण विचार लब्धप्रतिष्ठ कवि लीलाधर मंडलोई ने 13 जून 2012 को साहित्य अकादेमी द्वारा उन पर केंद्रित ‘कवि-संधि’ कार्यक्रम में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि मैं अपनी कविताओं की भाषा और फार्म में लगातार तोड़-फोड़ करता रहता हूँ। मेरे पहले कविता-संग्रह में जहाँ बुंदेली के चौकड़िया छंद का प्रभाव है तो अगले संग्रहों में उर्दू का प्रभाव। दूरदर्शन में कार्य के दौरान कविताओं को कैमरे की नज़र से भी लिखने की कोशिश की। मैं जहाँ-जहाँ गया वहाँ की भाषा, मुहावरे को कविता में उतारने की कोशिश करता रहा हूँ।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दो दर्जन से ज्यादा कविताओं का पाठ किया। ‘गिरगिट’, ‘घरेलू मक्खी’, ‘त्यौहार का दिन’, ‘रिश्ता’, ‘बेटियों से क्षमा याचना’, ‘आदिवासियों का आधुनिक प्रार्थना गीत’, ‘दिल्ली के बारे में’ आदि कविताओं को श्रोताओं ने बेहद पसंद किया।

कार्यक्रम के आरम्‍भ में अकादेमी के उपसचिव ब्रजेन्द्र त्रिपाठी ने उनका संक्षिप्त परिचय देते हुए कहा कि मंडलोई कविता में आदिवासियों मज़दूरों, प्रकृति के प्रति केवल सरोकर ही व्यक्त नहीं करते, उनको एक चुनौती के रूप में भी लेते हैं। वह बुद्धि-वैभव के अतिक्रांत संसार के बरबस अपनी कविता में मनुष्य के पास बुनियादी नातेदारी के साथ जाना चाहते हैं। कार्यक्रम के अंत में उनकी कविताओं पर टिप्पणी करते हुए प्रसिद्ध आलोचक विश्‍वनाथ त्रिपाठी ने कहा कि उनकी कविता में केवल माँ ही नहीं पूरा परिवार लिपट कर आता है जो बहुत बड़ी बात है।

कार्यक्रम में उनकी पीढ़ी के कवियों के अलावा अनेक युवा कवि भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। पंकज सिंह, मंगलेश डबराल, दिनेश कुमार शुक्ल, मदन कश्यप, प्रभाकर श्रोत्रिय, अनामिका, मिथिलेश श्रीवास्तव, विष्णु नागर, विमल कुमार, कुमार अनुपम आदि कुछ प्रमुख नाम हैं।

प्रस्तुति: अजय कुमार शर्मा

जीवन की बेहतरी के लिए कविता जरूरी : मंडलोई

गुडग़ांव : सुरुचि साहित्य कला संस्थान की ओर से सीसीए स्कूल सभागार में 13 जून को आयोजित समारोह में दो कविता संग्रह और एक गजलों की सीडी का लोकार्पण किया गया। समारोह की अध्यक्षता चर्चित कवि लीलाधर मंडलोई ने की। उन्होंने जीवन को बेहतर बनाने के लिए कविता की जरूरत पर बल दिया।
इस अवसर पर जगदीश प्रसाद की कविताओं का संग्रह अतीत के प्रेत, मंजू भारती का बाल कविताओं का संग्रह इंद्रधनुष और राजगोपाल सिंह की गजलों की सीडी चंद पल तेरी बांहों में लोकार्पण किया गया। मदन कश्यप, लवलीन, डा. विवेक मिश्र आदि का काव्यपाठ भी हुआ।