नई दिल्ली : हिंदी के वरिष्ठ कवि-आलोचक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष चुने गए हैं। सन 1954 में स्थापित साहित्य अकादमी के इतिहास में यह पहला मौका है जब हिंदी का साहित्यकार उपाध्यक्ष चुना गया है। अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष पंजाबी के कवि-समालोचक सुतिंदर सिंह नूर के निधन के बाद से यह पद रिक्त चल रहा था। शनिवार को गुवाहाटी में इसके लिए हुए चुनाव में कन्नड़ के नाटककार प्रसन्ना और मैथिली साहित्यकार विद्यानाथ झा विदित भी प्रत्याशी थे। इसके लिए पड़े कुल 66 मतों में से 47 विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को मिले। प्रसन्ना को 15 और विदित को 4 वोट मिले।
गौरतलब है कि साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर नियुक्ति के लिए शुरू से ही निर्वाचन प्रणाली का प्रयोग किया जाता रहा है। इसमें मतदान अकादमी की सामान्य परिषद के सदस्य करते हैं। ये सदस्य विभिन्न राज्यों की अकादमियों के अलावा साहित्य-संस्कृति से जुड़ेराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि होते हैं। चुनाव नियमत: पांच वर्षों के लिए होता है। हालांकि तिवारी का कार्यकाल सिर्फ रिक्त अवधि यानी सन 2012 तक के लिए होगा।
1940 में कुशीनगर के रायपुर भैंसही-भेडिहारी गांव में जन्में विश्वनाथ प्रसाद तिवारी एक लोकप्रिय शिक्षक भी रहे। गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद से वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त हुए। वह गोरखपुर से प्रकाशित होने वाली साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका ‘दस्तावेज’ के संपादक हैं। यह पत्रिका रचना और आलोचना की पत्रिका है, जो 1978 से नियमित प्रकाशित हो रही है। सन् 2011 में उन्हें व्यास सम्मान प्रदान किया गया। इस समय वह हिन्दी सलाहकार मंडल, साहित्य अकादमी, नयी दिल्ली के संयोजक थे।



Recent Comments