जन सरोकारों से कट चुके मीडिया पर चल रहे प्रहसन पर युवा कवि नित्यानंद गायेन की कविता-
मीडिया दूर-दर्शन है
सरकारी वाचक है
मीडिया प्रभु है
बरखा है
वीर है
मीडिया–
दिशाहीन योद्धा का
छोड़ा हुआ तीर है
मीडिया–
सत्ता है
राडिया है
बहुत बढिया है
नोट के बदले
खबर है मीडिया
स्टिंग आपरेशन है
शोषण है
बार-बार एक ही समाचार
लगता है लूज मोशन है
मीडिया राखी सावंत है
मुठभेड़ है
मीडिया मतभेद है
हमें इसका बेहद खेद है
मीडिया डांस-डांस-डांस है
सास-बहू और साज़िश है
अपवाद है
अवसाद है
मीडिया अवसरवाद है
कुछ एकदम बर्बाद है
सबसे आगे
सबसे तेज़ है
सनसनी है
मीडिया वारदात है
यह सर-देसाई है
ज्ञानियों का
दबंगों का हक़ है
गुड लक है
मीडिया जानता है
जनता अनपढ़ है
भुलक्कड़ है
यह टी.आर.पी. की होड़ है
भ्रष्टाचार का नया पेड है
अदालत है
मीडिया कुछ लोगों की वकालत है
नेता-उद्योगपतियों का
पूंजी निवेश कुञ्ज है
यह हाथी का सूंड है
मीडिया –
तुलसी-मिहिर का
प्रेम प्रसंग है
खली है
महाबली है
मीडिया ख़बरों की उछाल है
देश में भूचाल है
मीडिया मायाजाल है …



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