बच्चों को पसंद आया कि‍ताबों का साथ

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ग़ाज़ियाबाद : इंदिरापुरम के रिहायशी इलाके ज्ञानखंड- 3 में 26 जनवरी को बच्चों के लिए घुमंतू पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। इसमें एकलव्य, एनबीटी, सीबीटी, विज्ञान-प्रसार आदि विभिन्न प्रकाशनों की किताबों के लगभग दो सौ से ज्यादा ‘टाइटल’ प्रदर्शित किये गये।

घुमंतू पुस्तक मेले की संयोजक कोमल मनोहरे ने बताया, ‘इस तरह के आयोजन हम लगभग डेढ़ सालों से अलग-अलग स्कूलों, बस्तियों, ‘हाउसिंग सोसाइटी’ में कर रहे हैं। इस अभियान का मकसद किताबों से दूर हो रहे बच्चों को किताबों से दोस्ती कराना है और अच्छी किताबों को उन तक पहुँचाना है। जो भी हमारे इस अभियान को जानते हैं, वे हमें अपनी सोसाइटी या स्कूल में बुलाते हैं’।

बकौल कोमल अब यहाँ ही देख लीजिये रश्मि जी ने हमारे अभियान के बारे में सुना और हमें यहाँ बच्चों के बीच यह आयोजन करने का मौका मिला। इस कार्यक्रम की आयोजक रश्मि भरद्वाज पेशे से शिक्षिका हैं। वह कहती हैं, ‘किताबें बच्चों के परवरिश में सबसे ज्यादा सहायक हैं और इस टेलीवाइज्ड युग में किताबें कहाँ पढ़ी जाती हैं। हम तो इन बच्चों को किताबों की आदत डाल रहे है और बहुत हद तक सफल भी हुए हैं।’

इस कार्यक्रम में बच्चों को कहानी सुनायी गई। बच्‍चों ने अपने मन के विषयों के चित्र बनाये। उनके बनाए चि‍त्रों को कार्यस्‍थल पर प्रदर्शित कि‍या गया। उन्हें एक लघु फ़िल्म ‘कंचे और पोस्टकार्ड’ भी दिखाई गई, जिसे रिदम जानवे ने निर्देशित किया है।

बारिश और कड़ी ठंड के बावज़ूद मेले में ज्ञान खंड-3 व आसपड़ोस के लोगों का आना-जाना लगा रहा।

बच्चों ने उत्सुकता और दिलचस्पी से इस आयोजन में भाग लिया जिसके संयोजन में माही और स्नेहा की महत्वपूर्ण भागीदारी रही।

4 comments on “बच्चों को पसंद आया कि‍ताबों का साथ

  1. IVAR UTIAL says:

    कोमल मनोहरे जी,
    आपके द्वारा आयोजित किये जा रहे मेले के बारे में जानकर न केवल प्रसन्नता हुई वरन् ऐसा लगा मानों मेरा सपना किसी ने साकार कर दिया l
    वास्तव में दिल्ली के एक पापुलर पुस्तक बिक्रेता के साथ हमने ‘मूविंग लायब्रेरी औन वैन’ नामक योजना बनायी थी ज़िसमें हमारा इरादा उ. प्र. भर में जगह-जगह घूमकर किताबों का प्रचार प्रसार करने का था l दुर्भाग्यवश यह योजना पूरी नहीं हो सकी परंतु आपका यह प्रयास देखकर लगा कि चलो किसी स्तर पर भी सही, यह कार्य ज़मीन पर तो उतरा l
    बच्चे पुस्तकें पढ़ना पसंद नहीं करते , इस बात का मैं शुरू से विरोध करता रहा हूँ l वास्तव में इसके लिये दोषी हम स्वयं हैं l पुस्तकें रोचक और उपयोगी हों तो भला कौन बच्चा इनकी तरफ नहीं खिचेगा बशर्ते ये उनके पास तो पहुँचें l मेरी पुस्तकों की लाखों की बिक्री के आंकड़े तो यही सिद्ध करते हैं l
    वास्तव में पुस्तक और बच्चों के बीच दूरी हमने पैदा की है l हम न तो स्वयं पढ़ते हैं और न अपने बच्चों को पुस्तकें उपलब्धकरा कर उन्हें प्रेरित करते है l
    खैर ! आपके इससे प्रयास के लिये साधुवाद , साथ ही रश्मि भारद्वाज जी जैसी अध्यापिकाओ का मैं धन्यवाद करना चाहूंगा जो वास्तव में समाज के प्रति अपना उत्तरदायित्व पूरी तरह निभा रही हैं l
    अपने इस अभियान की प्रगति के बारे में मुझे भी जानकारी देतीं रहे तो आभारी रहूँगा l
    शुभकामनाओं के साथ ..

    आइवर यूशिएल
    लोकप्रिय बालविज्ञान लेखक
    09456670808
    ivarutial@rediffmail.com
    http://www.ivarutial.com

  2. Harshvardhan says:

    आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्मदिवस : कवि प्रदीप और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर …. आभार।।

  3. Harshvardhan says:

    आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्मदिवस : कवि प्रदीप और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर …. आभार।।

  4. गीतेश says:

    सराहनीय प्रयास । कारवाँ बढ़ता चले ।

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