Archive for: February 2015

‘शिक्षा-कुशिक्षा’ का विमोचन

शिक्षा-कुशिक्षा का विमोचन करते पंकज बिष्ट, प्रेमपाल शर्मा और कौशलेन्द्र प्रपन्न ।

शिक्षा-कुशिक्षा का विमोचन करते पंकज बिष्ट, प्रेमपाल शर्मा और कौशलेन्द्र प्रपन्न ।

नई दिल्‍ली : प्रगति मैदान में आयोजित विश्‍व पुस्‍तक मेले में 22 फरवरी को प्रेमपाल शर्मा के लेख संग्रह की किताब ‘शिक्षा-कुशिक्षा’ का विमोचन कथाकार और ‘समयांतर’ के संपादक पंकज बिष्‍ट और शिक्षाविद कौशलेन्‍द्र प्रपन्‍न ने किया।

कथाकार प्रेमपाल शर्मा पिछले 20 वर्षों से शिक्षा के अनेकों पहलुओं पर लगातार लिख रहे हैं। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो सादगी सिखाए, श्रम की महत्‍ता बताए, जाति धर्म से दूर रखे। पुस्‍तक में शामिल सभी लेख इन मूल्‍यों को रेखांकित करते हैं।

इस अवसर चकमक के संपादक सुशील शुक्‍ल, कुमार मुकुल, डा. ओपी सिंह, डा. किरण भारती, संजीव ठाकुर, वर्षा आदि मौजूद थे।

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इस पुस्तक का मूल्य अजिल्द 100 रुपये और सजिल्द 180 रुपये है।

अन्य जानकारी के लिए संपर्क करें-
लेखक मंच प्रकाशन
433, नीतिखंड-3
इंदिरापुरम-201014
गाजियाबाद
मोबाइल नंबर-9871344533
ईमेल-anuraglekhak@gmail.com

 ‘प्रेमचंद : बच्‍चों की कहानियां’ का विमोचन

Premchand  Bachon Ki Kahaniyan

नई दिल्‍ली : प्रगति मैदान में चल रहे विश्‍व पुस्‍तक मेले में 20 फरवरी को लेखक मंच प्रकाशन से प्रकाशित अमर कथाकार प्रेमचंद की बालोपयोगी कहानियों की पुस्‍तक ‘प्रेमचंद : बच्‍चों की कहानियां’ का विमोचन चर्चित कवि और ज्ञानोदय के संपादक लीलाधर मंडलोई ने किया।

इस पुस्‍तक में ईदगाह, बडे़ भाई साहब, गुल्‍ली-डंडा, बूढ़ी काकी, खेल, नशा जैसी कालजयी कहानियों
को संकलित किया गया है। इन कहानियों का चयन कथाकार प्रेमपाल शर्मा ने किया है। उन्‍होंने कहा कि हमें बच्‍चों में अपनी भाषा में पढ़ने की ललक जगाने के लिए प्रेमचंद को घर-घर पहुंचाने की जरूरत है।

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इस पुस्तक का मूल्य अजिल्द 60 रुपये और सजिल्द 110 रुपये है।

अन्य जानकारी के लिए संपर्क करें-
लेखक मंच प्रकाशन
433, नीतिखंड-3
इंदिरापुरम-201014
गाजियाबाद
मोबाइल नंबर-9871344533
ईमेल-anuraglekhak@gmail.com

स्कूलों में दीवार पत्रिका का प्रयोग बेहद उपयोगी : प्रेमपाल शर्मा

Deewar Patrika Aur Rachnatmakta

नई दिल्‍ली : प्रगति मैदान में आयोजित विश्‍व पुस्‍तक मेले में लेखक मंच प्रकाशन से प्रकाशित महेश चन्‍द्र पुनेठा की पुस्‍तक ‘दीवार पत्रिका और रचनात्‍मकता’ का विमोचन 18 फरवरी को कथाकार प्रेमपाल शर्मा और ‘चकमक’ पत्रिका के संपादक सुशील शुक्‍ल के हाथों किया गया। प्रेमपाल शर्मा ने कहा कि स्‍कूलों में दीवार पत्रिका का यह प्रयोग बेहद उपयोगी है। इसमें खर्च नाममात्र का है और इसे सुविधानुसार कभी भी निकाला जा सकता है। यह अपनी तरह की अनूठी किताब है।

सुशील शुक्‍ल ने कहा कि इस विषय पर हिंदी में यह पहली किताब है। इस तरह के प्रयास बच्‍चों की रचनात्‍मकता सामने लाने में सहायक हैं।

पुस्‍तक के लेखक महेश पुनेठा ने कहा कि हम पाठकों की कमी की बात बार-बार करते हैं। इसके लिए बचपन से ही बच्‍चों में पढ़ने-लिखने के संस्‍कार डालने होंगे। दीवार पत्रिका के माध्‍यम से बच्‍चों में आसानी से पढ़़ने-लिखने की रुचि उत्‍पन्‍न की जा सकती है।

इस अवसर पर चित्रकार कुंवर रवींद्र, कथाकार दिनेश कनार्टक, राजीव जोशी, कवि दिनकर कुमार आदि मौजूद थे।

महेश चन्‍द्र पुनेठा ने पुस्‍तक में दीवार पत्रिका के अपने अनुभव, बच्‍चों के अनुभव तथा उनके संपादकों से बातचीत शामिल की है। साथ ही समानधर्मी शिक्षकों के अनुभव भी ।

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इस पुस्तक का मूल्य अजिल्द 80 रुपये सजिल्द 150 रुपये है।

अन्य जानकारी के लिए संपर्क करें-
लेखक मंच प्रकाशन
433, नीतिखंड-3
इंदिरापुरम-201014
गाजियाबाद
मोबाइल नंबर-9871344533
ईमेल-anuraglekhak@gmail.com

 

‘वैज्ञानिकों के रोचक और प्रेरक प्रसंग’ का विमोचन

पुस्‍तक का विमोचन करते विजय खंडूरी, सुभाष चंद्र लखेड़ा,  शिवमूर्ति, प्रेमपाल शर्मा और देवेंद्र मेवाड़ी।

पुस्‍तक का विमोचन करते विजय खंडूरी, सुभाष चंद्र लखेड़ा, शिवमूर्ति, प्रेमपाल शर्मा और देवेंद्र मेवाड़ी।

नई दिल्‍ली : प्रगति मैदान में चल रहे विश्‍व पुस्‍तक मेले में मंगलवार को सुभाष चंद्र लखेड़ा की पुस्‍तक ‘वैज्ञानिकों के रोचक और प्रेरक प्रसंग’ का विमोचन विज्ञान लेखक देवेंद्र मेवाड़ी, कथाकार शिवमूर्ति और शिक्षाविद प्रेमपाल शर्मा ने किया।

इस अवसर पर देवेंद्र मेवाड़ी ने कहा कि लेखक लिखता है और वैज्ञनिक शोध व खोज करता है। इस किताब की खासियत है कि इसे वैज्ञानिक ने लिखा है। इस पुस्‍तक में करीब सौ वैज्ञानिकों के प्रसंग हैं। इन्‍हें पढ़कर वैज्ञानिकों के बारे में समाज में बनी धारणा खत्‍म होती है कि वह कोई दूसरे ग्रह के प्राणी नहीं, बल्कि हमारी तरह ही सहज जीवन जीने वाले प्राणी हैं।

प्रेमपाल शर्मा ने कहा कि विज्ञान को जनप्रिय बनाने के लिए इस तरह की किताबों का प्रकाशन बेहद जरूरी है। उन्‍होंने सुझाव दिया कि सरल शब्‍दों में वैज्ञानिकों की जीवनी प्रकाशित की जानी चाहिए।

लेखक सुभाष चंद्र लखेड़ा ने कहा कि एक बार उनसे किसी ने पूछा कि विज्ञान दृष्टि क्‍या है? मैंने उसने कहा कि जब आप एक किलो दाल लाते हैं और आपको संदेह होता है तो क्‍या करते हैं। उसने जवाब दिया कि एक किलो के बाट से तौलकर देख लेते हैं। मैंने कहा कि जब भी कोई बात हो तो उसे एक पैमाने या मानक पर परखना ही वैज्ञानिक दृष्टि है। उन्‍होंने पुस्‍तक में संकलित अमेरिकन गणितज्ञ वाइनर के भुलक्‍कड़पन से जुड़ा एक प्रसंग भी सुनाया कि कैसे वह अपनी बेटी तक को भूल गए।

इस अवसर पर विजय खंडूरी, राजकुमार, अनुराग, रोशनी आदि उपस्थित थे।

पुस्‍तक विमोचन कार्यक्रम में विचार व्‍यक्‍त करते पुस्‍तक लेखक सुभाष चंद्र लखेड़ा।

पुस्‍तक विमोचन कार्यक्रम में विचार व्‍यक्‍त करते पुस्‍तक लेखक सुभाष चंद्र लखेड़ा।

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इस पुस्तक का मूल्य अजिल्द 80 रुपये सजिल्द 150 रुपये है।

अन्य जानकारी के लिए संपर्क करें-
लेखक मंच प्रकाशन
433, नीतिखंड-3
इंदिरापुरम-201014
गाजियाबाद
मोबाइल नंबर-9871344533
ईमेल-anuraglekhak@gmail.com