नई दिल्ली : ‘अंजना: एक विचार मंच’ की ओर से ‘सरोकारों के आईने में स्त्री’ विषय पर एक सभा दिल्ली के हिन्दी भवन (व्यास कक्ष) में 21 अप्रैल, 2012 को आयोजित की गई। इसमें सुविख्यात साहित्यकार रमणिका गुप्ता ने अध्यक्षता की व जानी-मानी साहित्यकार मैत्रेयी पुष्पा मुख्य अतिथि थीं। कार्यक्रम में डॉ. कमल कुमार व पत्रकार गीताश्री का विशेष सानिध्य रहा।
सभा में विषय प्रवर्तन करते हुए ‘अंजना: एक विचार मंच’ के अध्यक्ष प्रेमचंद सहजवाला ने कहा कि यह सुखद बात है कि पिछले दो दशकों में भारत की शहरी व शिक्षित नारी ने तेज़ी से प्रगति की है तथा राष्ट्रपति या मुख्यमंत्री आदि जैसे अतिविशिष्ट पदों के अतिरिक्त समाज के हर क्षेत्र यथा न्यायपालिका, चिकित्सा, शिक्षा आदि में स्त्री की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। स्त्री आज न अनुचरी है न ही केवल सहचरी मात्र, वरन वह अपने सम्पूर्ण व्यक्तित्व में उजागर होने के पथ पर अग्रसर है। परन्तु आज भी मध्यवर्गीय नारी गृहस्थी के पिंजरे में फँसे रहने को ही अपना मोक्ष मानती है।
सुप्रसिद्ध पत्रकार गीताश्री ने कहा कि वह अपने जीवन में जब ज़रूरत पड़ी विद्रोह करती आई हैं तथा वह यह मानती हैं कि स्त्री को यदि अपनी गुलामी का अहसास भर है तो वह मुक्त हो सकती है। यानी प्रश्न चेतना का है। डॉ. कमल कुमार ने समाज की सोच में समुचित बदलाव की बात कही तथा मैत्रेयी पुष्पा ने भी समाज में दृढ़ता से व्याप्त संस्कारों को बदलने पर ज़ोर दिया।
कार्यक्रम अध्यक्ष रमणिका गुप्ता ने कहा कि आज भी स्थिति यह है कि कहीं-कहीं एक पढ़ी-लिखी डॉक्टरेट महिला गलती होने पर अपने पति के पाँव पड़ कर माफी माँगती है। जब अंत में प्रश्नोत्तर के दौर में प्रेमचंद सहजवाला ने प्रश्न उठाया कि लड़कियों के भडकीले व कामोत्तेजक पहनावे के बारे में रमणिका जी का क्या कहना है तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया कि यह सारा पुरुषवादी सोच का कुसूर है। ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जहाँ नारी बहुत कम कपड़े पहनती है, परन्तु वहाँ के पुरुष इसे स्वाभाविक मान कर चलते हैं।
इस कार्यक्रम में रमणिका गुप्ता को ‘अंजना: एक विचार मंच’ की ओर से उनके अगले दिन (22 अप्रैल) आने वाले जन्मदिवस पर उर्मिल सत्यभूषण के कर कमलों से एक उपहार भी भेंट किया गया। कार्यक्रम का संचालन कवि जगदीश रावतानी ने किया तथा अनिल मीत ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।



Recent Comments