राय और कालिया का विरोध जारी

नई दिल्ली : नया ज्ञानोदय में प्रकाशित विभूतिनारायण राय के इंटरव्यू में लेखिकाओं के बारे में की गई अपमानजनक टिप्पणी का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसके लिए पत्रिका के संपादक को भी बराबर का जिम्मेदार ठहराते हुए लेखकों के समूह ने शुक्रवार को ज्ञानपीठ के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने पत्रिका के संपादक रवींद्र कालिया के इस्तीफे की मांग की। दूसरी ओर विभिन्न संगठनों ने भी इसके खिलाफ मोर्चा खोल लिया है।
ज्ञानपीठ के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करने वाले लेखकों का कहना है कि इसके लिए संपादक सबसे ज्यादा दोषी है क्योंकि उन्होंने महिला विरोधी बातचीत को बगैर संपादन छाप दिया। लेखकों ने कालिया के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और उन्हें अविलंब हटाने की मांग की। प्रदर्शन को उग्र होता देख भारतीय ज्ञानपीठ के आजीवन न्यासी आलोक जैन को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने इस मामले को न्यास के सामने उठाने की बात कही।
प्रदर्शन में संजीव, मैत्रेयी पुष्पा, रेखा अवस्थी, भाषा सिंह, सर्वेश, विमल कुमार, जीतेंद्र कुमार, गीताश्री, अनीता भारती आदि ने भाग लिया।
दूसरी ओर लखनऊ की साहित्यिक संस्था प्रतिमान की ओर से आयोजित गोष्ठी में लेखकों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विभूति नारायण की टिप्पणी की कड़ी निंदा की।
डा. कुसुम वाष्र्णेय ने गोष्ठी का संयोजन किया। गोष्ठी में प्रस्ताव पास किया कि पत्रिका के संपादक रवींद्र कालिया ने जिस तरह श्रेष्ठ साहित्यिक मूल्यों की विदाई कर बाजारूपन को प्रश्रय दिया है, यह उसी की कुत्सित परिणति है। यह लेखिकाओं की बेबाक अभिव्यक्ति को भोंथरा करने की सोची-समझी साजिश है। इसके लिए राय और कालिया समान रूप से जिम्मेदार हैं। प्रस्ताव में भारत सरकार और ज्ञानपीठ न्यास से मांग की गई कि दोनों को उनके दायित्व से मुक्त कर दिया जाए। लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूपरेखा वर्मा, कवयित्री कात्यायनी, नरेश सक्सेना, आलोचक वीरेंद्र यादव आदि ने विचार रखे।
उत्तराखंड की संस्था महिला समाख्या प्रदेश के सभी जिलों में प्रेस कांफे्रंस कर राय की टिप्पणी का विरोध कर रही है।

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