नई दिल्ली : साहित्य अकादेमी के ‘कवि-संधि’ कार्यक्रम में 08 दिसंबर, 2011 को हिन्दी के वरिष्ठ कवि दिनेश कुमार शुक्ल का कविता-पाठ आयोजित किया गया। शुक्ल ने कानपुर प्रवास के दौरान लिखी गई अपनी दो छोटी कविताओं ‘भाई कवि’ और ‘खोलो आँख’ से शुरू कर 15 अन्य कविताएँ प्रस्तुत कीं। सस्वर पढ़ी गई इन कविताओं में कुछ लम्बी कविताएँ ‘यह रंग है क्या?’ तथा ‘चैत की चैपाई’ भी शामिल थीं। ‘यह रंग है क्या?’ शीर्षक कविता की यह पंक्तियाँ श्रोताओं द्वारा बेहद पसंद की गईं -
बहुत से रंग हैं उधेड़बुन के उन्हीं में दुनिया उलझ रही है
कहीं जो साबुन का बुलबुला है उसी को सूरज समझ रही है।
समय के गिरगिट ने रंग बदला रंगों के रंग भी बदल गए हैं।
गुफा से आकर पुराने अजगर तमाम इतिहास निगल गये हैं।
‘नया नियम’ शीर्षक की यह पंक्तियाँ भी सराही गईं-
अब कहाँ सम्भव
बिना आवाज़ का संगीत
बिना भाषा की कविता
बिना हवा का तूफ़ान
बिना बीज के फल
बिना युद्ध का समय
नहीं,
उस तरह सम्भव नहीं हो पाता
अब संसार।
उनके द्वारा सुनाई गई अन्य कविताओं के शीर्षक थे- ‘काया की माया रतनज्योति’, ‘चतुर्मास’, ‘सुबह से पहले’, ‘पान-फूल’, ‘षटपद’, ‘पुनुरोदय’, ‘चैत की चैपाई’, ‘भूल’, ‘सागर का सभागार’, ‘आएँगे हम भी अगर आ पाये’, ‘विलोमानुपात’, ‘पूस के खेत की रात, जगह जानी-पहचानी’।
कविता-पाठ से पहले अकादेमी के उपसचिव ब्रजेन्द्र त्रिपाठी ने दिनेश कुमार शुक्ल का परिचय देते हुए कहा कि शुक्ल जी की कविता में हम अतिपरिचित समय के अलिखित चहरे को भी पढ़ सकते हैं। उनकी कविता समस्त आशंकाओं, स्मृतियों, संवेदनाओं को सुरक्षित रखने की कविता है। खास देशज और लोक स्वर उनकी विशिष्टता है। उनकी कविता में स्मृति और यथार्थ की अनुभूतियों को महसूस किया जा सकता है।
1950 में कानपुर के नर्वल गाँव में जन्मे दिनेश कुमार शुक्ल की पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हुई। उनका पहला कविता-संग्रह ‘समयचक्र’ 1997 में आया। इसके बाद आपके छह अन्य काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए हैं। ताजा काव्य-संग्रह ‘समुद्र में नदी’ इसी वर्ष ‘भारतीय ज्ञानपीठ’ से आया है। आपने पाब्लो नेरूदा की कविताओं का अनुवाद भी किया है जो एक काव्य पुस्तक के रूप में प्रकाशित है। ‘केदार सम्मान’ और ‘सीता स्मृति सम्मान’ से सम्मानित शुक्ल गुड़गाँव में रह रहे हैं।
कार्यक्रम में नामवर सिंह, केदारनाथ सिह, विश्वनाथ त्रिपाठी, मंगलेश डबराल, त्रिनेत्र जोशी, मदन कश्यप, मिथिलेश श्रीवास्तव, वीरेन्द्र कुमार वरनवाल, प्रेमपाल शर्मा, रामकुमार कृषक व अन्य कवि/लेखक उपस्थित थे।
प्रस्तुति – अजय कुमार शर्मा



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