हिंदी बाल साहित्य की 20 सर्वश्रेष्ठ किताबें : प्रकाश मनु

प्रकाश मनु

हिंदी में भी बहुत महत्‍वपूर्ण बाल साहित्‍य लिखा गया है। इस खजाने से बीस मोतियों को चुना है प्रसिद्ध लेखक प्रकाश मनु ने-

1

किताब : कुत्ते की कहानी (उपन्यास)
लेखक : प्रेमचंद
प्रकाशक : संदर्भ प्रकाशन, दिल्ली
मूल्य : 70 रुपये

हिंदी बाल उपन्यास का यह बड़ा सौभाग्य है कि उसकी नींव रखने का श्रेय उपन्यास सम्राट प्रेमचंद को जाता है। प्रेमचंद की रचना ‘कुत्ते की कहानी’ हिंदी का पहला बाल उपन्यास है। ‘कुत्ते की कहानी’ की भूमिका में प्रेमचंद ने बाल पाठकों को संबोधित करते हुए लिखा है, ‘तुम देखोगे कि यह कुत्ता बाहर से कुत्ता होकर भी भीतर से तुम्हारे ही जैसा बालक है, जिसमें वही प्रेम और सेवा तथा साहस और सच्चाई है, जो तुम्हें इतनी प्रिय है।’ गली में भटकने वाले इस मामूली कुत्ते कल्लू की हिम्मत और बहादुरी की वजह से एक अंग्रेज साहब का ध्यान उस पर गया और देखते ही देखते वह उनका प्यारा और दुलारा दोस्त बन जाता है, जो संकट के समय उनकी जान बचाता है। कई बड़े और हैरतअंगेज कारनामों के बाद, अब उसे साहबों की तरह टेबल पर खाना मिलता है। नौकर-चाकर हमेशा सेवा करने और टहलाने के लिए मौजूद हैं। पर कल्लू सुखी नहीं है। वह महसूस करता है कि अब उसके पास सारे सुख हैं, लेकिन गले में गुलामी का पट्टा बंधा हुआ है और गुलामी से बड़ा कोई दु:ख नहीं है। यह एक दस्तावेजी उपन्यास है जिसमें प्रेमचंद की कलम का जादू मोह लेता है।

2

किताब : बजरंगी-नौरंगी (उपन्यास)
लेखक : अमृतलाल नागर
प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली
मूल्य : 15 रुपये

हिंदी के दिग्गज उपन्यासकार अमृतलाल नागर का ‘बजरंगी-नौरंगी’ एक लाजवाब और जिंदादिली से भरपूर उपन्यास है, जिसमें नागरजी की किस्सागोई का जाना-पहचाना अंदाज अपने पूरे रंग में नजर आता है। असल में बजरंगी और नौरंगी के रूप में उन्होंने जिन पात्रों को लिया है, वे हैं भी बड़े गजब के। बजरंगी और नौरंगी दोनों भाई हैं और दोनों में ऐसी-ऐसी खासियतें हैं कि अपनी-अपनी जगह दोनों ही बेजोड़ हैं। इनमें बजरंगी तो बड़े लहीम-शहीम और ऐसे आदमकद किस्म के पहलवान हैं कि चारों ओर उनके नाम की दुंदुभी बजती है। उपन्यास में बजरंगी पहलवान मायावी किले वाले जादूगर को पछाडऩे निकलते हैं, जिसने सबको आफत में डाल रखा है। वह मायावी राजा इतनी रहस्यमय शक्तियों से पूर्ण है कि उससे लड़ते-लड़ते बजरंगी पहलवान भी विचित्र मुसीबतों में फंस गए तो आखिर उन्हें छोटे भाई नौरंगी को याद करना पड़ा। फिर दोनों प्यारे भाई बजरंगी और नौरंगी मिलकर उस रहस्यमय राजा की रहस्यमयी शक्तियों की काट करते हुए किस तरह उसे पछाड़ते हैं और उस किले में गुलामों की-सी जिंदगी जी रहे लोगों को मुक्ति दिलाते हैं, यह उपन्यास पढ़कर ही जाना जा सकता है। उपन्यास इतनी जानदार भाषा-शैली में लिखा गया है तथा बजरंगी और नौरंगी के चरित्र इतने गजब के हैं कि हिंदी के बाल उपन्यासों में ‘बजरंगी-नौरंगी’ की धज कुछ अलग ही नजर आती है।

3

किताब : पहाड़ चढ़े गजनंदनलाल (कहानी)
लेखक : विष्णु प्रभाकर
प्रकाशक : प्रकाशन विभाग, नई दिल्ली
मूल्य : 42 रुपये

‘पहाड़ चढ़े गजनंदनलाल’ में हिंदी के दिग्गज साहित्य विष्णु प्रभाकर की बच्चों के लिए लिखी गई बारह चुस्त-चपल कहानियाँ शामिल हैं। इनमें ‘पहाड़ चढ़े गजनंदनलाल’ और ‘दक्खन गए गजनंदनलाल’ एकदम निराली हैं। इन्हें पढ़ते हुए कभी हँसी की फुरफुरी छूट निकलती है तो कभी भीतर कोई गहरा एहसास बस जाता है, जो हमें जिंदादिली से जीने की ताकत देता है। इन कहानियों का नायक गजनंदनलाल है ही ऐसा, जो शरीर से भारी-भरकम होते हुए भी तेज बुद्धि का और बड़ा हरफनमौला है। यों संग्रह की हर कहानी में कुछ ऐसा है जिसमें एक बड़े कथाकार की मंजी हुई लेखनी का स्पर्श मन को मुग्ध करता है।

4

किताब : गीत भारती (कविता)
लेखक : सोहनलाल द्विवेदी
प्रकाशक : प्रकाशन विभाग, नई दिल्ली
मूल्य : 20 रुपये

सोहनलाल द्विवेदी हिंदी बाल कविता के भगीरथों में से हैं जिन्होंने बाल कविता को हर बच्चे की जुबान तक पहुँचाया। ‘गीत भारती’ में द्विवेदी जी की चुनी हुई बीस सुंदर और अनूठी बाल कवितायें हैं जिनमें बड़ी विविधता और रस है। खासकर ‘अगर कहीं मैं पैसा होता’, ‘सपने में’, ‘नीम का पेड़’, ‘घर की याद’ ऐसी कविताएँ हैं जिनमें बहुत थोड़े शब्दों में जीवन की गहरी बातें उड़ेल दी गई हैं। इसीलिए ये ऐसी निराली और बेमिसाल कविताएँ हैं जिनसे बचपन में दोस्ती हो जाए तो ये जीवन भर साथ चलती हैं, कभी गुदगुदाती तो कभी राह दिखाती हैं।

5

किताब : आटे-बाटे सैर सपाटे (कविता)
लेखक : कन्हैयालाल मत्त
प्रकाशक : सुयोग्य प्रकाशन, नई दिल्ली
मूल्य : 125 रुपये

कन्हैयालाल मत्त की निराले अंदाज की बाल कविताओं की लंबे अरसे तक धूम रही है, जिनमें अजब सी मस्ती और फक्कड़ता है। बच्चे आज भी उनकी कविताओं के दीवाने हैं। ‘आटे-बाटे सैर-सपाटे’ मत्त जी की बाल कविताओं का प्रतिनिधि संकलन हैं, जिसमें उनकी 51 चुनिंदा कवितायें हैं। इनमें ‘चल भई काके’, ‘जाड़े का गीत’, ‘चिडिय़ा रानी किधर चली’, ‘आटे-बाटे सैर सपाटे’, ‘चांद का सफर’, ‘पर्वत और गिलहरी’ तथा ‘तोतली बुढिय़ा’ जैसी मजेदार कवितायें हैं जिनमें गजब की लयात्मकता के साथ-साथ बात कहने का अलमस्त अंदाज और हास्य-विनोद की फुहारें बच्चों को खूब रिझाती हैं।

6

किताब : बतूता का जूता (कविता)
लेखक : सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली
मूल्य : 20 रुपये

‘बतूता का जूता’ हिंदी के मूर्धन्य कवि सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की बच्चों के लिए लिखी गई ऐसी कविताओं का संग्रह है जिन्होंने बाल कविता को नया मोड़ दिया। इस छोटी-सी पुस्तक में सर्वेश्वर की अठारह बाल कवितायें हैं, जो अपने समय में खूब चर्चित हुई थीं और आज भी उनका वही जादू बरकरार है। इनमें कई कवितायें तो ऐसी हैं जिन्हें गर्व से विश्व की किसी भी समर्थ भाषा की अच्छी से अच्छी बाल कविता के समकक्ष रखा जा सकता है। ‘इब्नबतूता पहन के जूता/निकल पड़े तूफान में,/थोड़ी हवा नाक में घुस गई/घुस गई थोड़ी नाक में…!’ जैसी पंक्तियों में जादुई लयकारी ऐसी है कि खुद ब खुद हमारा मन उनके साथ थिरकने लगता है।

7

किताब : तीनों बंदर महाधुरंधर (कविता)
लेखक : डॉ. शेरजंग गर्ग
प्रकाशक : आत्माराम एंड संस, दिल्ली
मूल्य : 75 रुपये

‘तीनों बंदर महाधुरंधर’ बच्चों के लिए लिखी गई डॉ. शेरजंग गर्ग की चुनिंदा इक्यावन कविताओं का संग्रह है। इस अनूठे संग्रह में डॉ. गर्ग की सबसे सुंदर और चर्चित कवितायें एक जगह आ गई हैं। ऐसी कवितायें जो अपनी चुस्ती और निराले जादू के कारण भारत के लगभग हर भाग में पहुँची है और हर बच्चे ने जिन्हें पसंद किया। ये ऐसी कवितायें हैं जिन्हें पढ़कर एक समूची पीढ़ी अब युवा हो गई है, पर इन कविताओं का जादू अब भी उतरा नहीं है। एक ओर इस पुस्तक में भोलेपन की मस्ती से भरे सुंदर और छबीले शिशुगीत शामिल हैं, तो दूसरी ओर ‘तीनों बंदर महा धुरंधर’ और ‘यदि पेड़ों पर उगते पैसे’  जैसी कवितायें, जिनमें खेल-खेल में बड़ी बातें सिखाई गई हैं। खूबसूरत ढंग से छपा यह ऐसा संग्रह है जिसे पढऩे का सुख किसी दुर्लभ उपहार को पा लेने जैसा है।

8

किताब : मेरे प्रिय शिशुगीत (कविता)
लेखक : डॉ. श्रीप्रसाद
प्रकाशन : हिमाचल बुक सेंटर, दिल्ली
मूल्य : 250 रुपये

हिंदी में बढिय़ा शिशुगीत लिखने वालों में डॉ. श्रीप्रसाद शीर्ष पर हैं। अपने चुस्त नटखट शिशुगीतों के लिए चर्चित रहे डॉ. श्रीप्रसाद के चुने हुए सुंदर शिशुगीतों का संकलन ‘मेरे प्रिय शिशुगीत’ एक सुखद विस्मय की तरह हैं। ‘मेरे प्रिय शिशुगीत’ में डॉ. श्रीप्रसाद के रंग-रंग के ढेरों शिशुगीत हैं। इनमें ‘भूखा मुझे उठाया है’, ‘दही-बड़ा’, ‘बड़ी बुआ’, ‘लड्डमल पेड़ा सरदार’ जैसे तमाम बढिय़ा खिलदंड़े शिशुगीत भी हैं, जिनके जिक्र के बगैर हिंदी शिशुगीत की चर्चा हो ही नहीं सकती। पुस्तक में ज्यादातर ऐसे शिशुगीत हैं जिनके साथ बच्चे खिलखिलाते हैं और कुछ सीखते भी हैं। बेहद खूबसूरत और सुरुचिपूर्ण ढंग से छपी यह किताब एक मानक की तरह हैं।

9

किताब : सूरज का रथ (कविता)
लेखक : बालस्वरूप राही
प्रकाशक : मेधा बुक्स, दिल्ली
मूल्य : 25 रुपये

एक दौर था जब बालस्वरूप राही की कविताएँ हर बच्चे के होंठों पर नाचती थीं। आज भी उनका वही जादू बरकरार है। यहाँ तक कि बड़े भी उनके रस से भीगते और रीझते हैं। ‘सूरज का रथ’ में राही जी की लीक से अलग हटकर लिखी गई इक्कीस बाल कविताएं हैं जिनमें नई सूझ, नए रंग और कुछ नया ही जादू है। खासकर ‘सूरज का रथ’ इस पुस्तक की ऐसी बेजोड़ कविता है जो सही मायने में अजब, गजब और यादगार है। यों ‘रंग जमाया टीवी ने’, ‘चूहे को निमंत्रण’, ‘लाल किला’, ‘चलती है लू’ समेत संग्रह की हर कविता ऐसी है जिसे पढ़कर बच्चे झूम उठते हैं।

10

किताब : कमलेश्वर के बाल नाटक (नाटक)
लेखक : कमलेश्वर
प्रकाशक : प्रवीण प्रकाशन, नई दिल्ली
मूल्य : 150 रुपये

कमलेश्वर के बाल नाटकों का अपना अलग रंग है, जो बच्चों को ही नहीं, बड़ों को भी लुभाता है। ‘पैसों का पेड़’ में उनके समूचे बाल नाटक एक साथ पढऩे को मिल जाते हैं। कमलेश्वर के ये नाटक खेल-खेल में बड़ी बात कहते हैं और बच्चों को सही मायने में समझदार बनाते हैं। ‘पिटारा’, ‘जेबखर्च’, ‘झूठी दीवारें’, ‘डॉक्टर की बीमारी’ नाटक एकदम नए ढंग के हैं और कथ्य, भाषा और अंदाज में बहुत कुछ पुराना तोड़ और छोड़कर बाल नाटकों की एक नई राह बनाने की कोशिश के साथ लिखे गए हैं। खासकर ‘पिटारा’ नाटक इसलिए आकर्षित करता है, क्योंकि ऊपर से हलके-फुलके लगते इस नाटक में बहुत कुछ गंभीर भर दिया गया है। ‘झूठी दीवारें’ में देश की सांस्कृतिक विविधता की मनोरंजक तस्वीर है। हालाँकि पुस्तक का सबसे प्रभावशाली और लाजवाब नाटक है ‘पैसों का पेड़’ जो एक साथ मनोरंजक और प्रेरक भी है। हिंदी में बच्चों के लिए लिखे गए इतने सहज, सफल नाटक कम ही हैं।

11

किताब : गणित देश और अन्य नाटक (नाटक)
लेखक : रेखा जैन
प्रकाशक : रत्नसागर, दिल्ली
मूल्य : 29.90 रुपये

रेखा जैन की गिनती हिंदी के उन सिरमौर नाट्यकर्मियों में की जाती है जिन्होंने बच्चों के साथ खेल-खेल में नाटक लिखे और उन्हें उतने ही अनौपचारिक लेकिन अनूठे अंदाज में पेश किया। उनका पूरा जीवन बाल नाटकों के लिए समर्पित रहा। ‘गणित देश और अन्य नाटक’ में रेखा जी के अलग-अलग रंग और शेड्स के छह बहुचर्चित नाटक है, जिनमें ‘गणित देश’ का तो जवाब ही नहीं। ज्यादातर बच्चे गणित से डरते हैं। पर गणित से डरने वाले उन बच्चों के लिए ऐसा खिलंदड़ा नाटक भी बुना जा सकता है, इसकी कल्पना करना मुश्किल है। इसी तरह ‘माल्यांग की कूची’ में कल्पना और मानवीय करुणा का अनोखा मेल है। ‘स्वाधीनता संग्राम’ में आजादी की लड़ाई की पूरी कहानी एक छोटे से मर्मस्पर्शी नाटक में समेट दी गई है तो ‘रामायण प्रसंग’ में रामकथा को एक सुंदर और रसपूर्ण नाटक की शक्ल में ढाला गया है। रेखा जी के नाटकों का यह ऐसा संग्रह है बच्चे जिसे खोज-खोजकर पढऩा और मंचित करना चाहेंगे।

12

किताब : दूसरे ग्रहों के गुप्तचर (उपन्यास)
लेखक : हरिकृष्ण देवसरे
प्रकाशक : शकुन प्रकाशन, नई दिल्ली
मूल्य : 30 रुपये

‘दूसरे ग्रहों के गुप्तचर’ हरिकृष्ण देवसरे का कमाल का जासूसी बाल उपन्यास है, जिसमें वैज्ञानिक फंतासी बहुत करीने से बुनी गई है। उपन्यास का कथा-विन्यास और दृश्य गजब के हैं जो खासी रहस्यात्मकता की सृष्टि करते हैं। उपन्यास की कथा कुल मिलाकर यह है कि किसी दूसरे ग्रह के लोग, जो विज्ञान में यहाँ से काफी ज्यादा उन्नत हैं, जासूसी करने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। वे यहाँ एक भव्य होटल स्थापित करते हैं, जो लोगों के लिए किसी आश्चर्यलोक से कम नहीं है। पूरे होटल में आर्डर लेने, खाने-पीने की चीजें लाने, सफाई करने या फिर पैसे लेने के लिए कोई आदमी नहीं है। सारे काम रोबोटों के जरिये होता है। उपन्यास में दो किशोर दोस्त राकेश और राजेश इसका रहस्य जानने के लिए निकलते हैं, तो एक के बाद एक कौतुकपूर्ण घटनायें घटने लगती हैं। देवसरे जी के इस उपन्यास में वैज्ञानिक फंतासी का इतना कमाल का इस्तेमाल हुआ है कि इसे साँस रोककर पढऩा पड़ता है।

13

किताब : घडिय़ों की हड़ताल (उपन्यास)
लेखक : रमेश थानवी
प्रकाशक : एनसीईआरटी, नई दिल्ली
मूल्य : 40 रुपये

रमेश थानवी का उपन्यास ‘घडिय़ों की हड़ताल’ सही मायने में एक प्रयोगधर्मी उपन्यास है, जिसमें हमारा समय और सच्चाइयाँ खुलकर सामने आती हैं। उपन्यास की कथा बहुत संक्षिप्त-सी है। पर उसे इस जिंदादिली से कहा गया है कि ‘घडिय़ों की हड़ताल’ इधर के बाल उपन्यासों में एक यादगार उपन्यास बन गया है। उपन्यास की शुरुआत में ही घडिय़ों की इस अनोखी हड़ताल का जिक्र है जिससे सब जगह हड़कंप मच जाता है और सारे काम रुक जाते है। लोग हैरान होकर देखते हैं कि अरे, यह क्या? घड़ी की सूइयाँ तो आगे बढ़ ही नहीं रहीं! बमुश्किल घडिय़ों की यह हड़ताल खत्म होती है, जिसने जीवन के पहियों की गति को ही रोक दिया था और पूरा देश जैसे थम सा गया था। रमेश थानवी का यह बच्चों के लिए लिखा गया अकेला उपन्यास है, पर यह बेशक बच्चों के मन में अपनी गहरी छाप छोड़ता है।

14

किताब : भोलू और गोलू (उपन्यास)
लेखक : पंकज बिष्ट
प्रकाशक : नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया
मूल्य : 14.5 रुपये

पंकज बिष्ट के बाल उपन्यास ‘भोलू और गोलू’  में सर्कस में काम करनेवाले एक भालू के बच्चे भोलू और महावत के बच्चे गोलू की दोस्ती है। बड़ी ही प्यारी दोस्ती, जिससे दोनों को ही बड़ी खुशी मिलती है। खासकर भोलू तो गोलू से दोस्ती से पहले एकदम उदास और अनमना रहता है। इतना कि गोलू उसके निकट आया तो उसे देखकर उलटे खीज गया और उसे सबक सिखाने पर उतारू हो गया। पर आखिर भोलू ने गोलू के दिल के प्यार को पहचाना। फिर तो उसके जीवन में एक नया उत्साह और उमंग भर जाती है। सर्कस में अपनी बारी आने पर ऐसे-ऐसे कमाल के खेल वह दिखाता है कि क्या कहें! अंत में यह गोलू की कोशिशों का ही नतीजा है कि भोलू सर्कस से छूटकर जंगल में जा पहुँचता है। उस जंगल में जो सचमुच उसका अपना और बड़ा घर है। वहाँ अपनी मस्ती से जीते हुए भोलू कितना खुश है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं!

15

किताब : मैली मुंबई के छोक्रा लोग (उपन्यास)
लेखक : हरीश तवारी
प्रकाशक : ग्रंथ सदन, दिल्ली
मूल्य : 100 रुपये

हरीश तिवारी का ‘मैली मुंबई के छोक्रा लोग’ हिंदी बाल उपन्यासों के इतिहास में बहुत कुछ नया जोडऩेवाला एक अद्भुत बाल उपन्यास है, जिसमें मुंबई की जिंदगी के सच्चे अक्स हैं। ‘मैली मुंबई के छोक्रा लोग’ उपन्यास का नायक रोज-रोज दुख और अपमान के धक्के खाता झोंपड़पट्टी का एक लड़का है, जिसके भीतर आखिर पढऩे और कुछ कर दिखाने की लौ पैदा हो जाती है। कल की रोटी तक का ठिकाना नहीं है, लेकिन जिद बेमिसाल है। किताबों के लिए उसका प्यार बढ़ता ही जाता है। और आखिर जब वह अपने जीवन की इस कठिन परीक्षा से गुजरकर, अपनी प्रतिभा की धाक जमा लेता है, तो लोग दाँतों तले उँगली दबा लेते हैं। उपन्यास में मुंबई के शोषण और अभावग्रस्त जीवन की बड़ी मार्मिक शक्लें हैं, जो मन पर गहरा असर डालती है।

16

किताब : चिडिय़ा और चिमनी (उपन्यास)
लेखक : देवेंद्र कुमार
प्रकाशक : आकाशदीप पब्लिकेशंस, दिल्ली
मूल्य : 50 रुपये

देवेंद्र का सबसे सशक्त उपन्यास है ‘चिडिय़ा और चिमनी’, जो आज की पर्यावरण की समस्या को इतनी संजीदगी से उठाता है कि उससे बाल उपन्यास को एक नई शक्ति ही नहीं, बल्कि एक अलग पहचान और अर्थवत्ता भी मिल जाती है। ‘चिडिय़ा और चिमनी’ में एक फैक्ट्री है, जिसकी चिमनी से रात-दिन काला धुआँ निकलता रहता है। यह धुआँ इतना खराब और प्रदूषणकारी है कि इससे चिडिय़ा का गला खराब हो जाता है और खाँसी के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती जाती है। नन्ही चिडिय़ा की यह हालत हाथी दादा से देखी नहीं जाती। आखिर जंगल के सारे जानवर मिलकर उस फैक्ट्री को घेर लेते हैं और चिमनी को तोड़ देना चाहते हैं। मगर फिर समझ में आया कि फैक्ट्री के बंद हो जाने पर सैकड़ों मजदूर बेरोजगार हो जाएँगे। तब एक बढिय़ा तरकीब निकली, जिससे चिडिय़ा और हाथी दादा ही नहीं, जंगल के सभी जानवर खुश हैं। बाल उपन्यास होते हुए भी ‘चिडिय़ा और चिमनी’ की रेंज बड़ी है।

17

किताब : शेरसिंह का चश्मा (कहानी)
लेखक : अमर गोस्वामी
प्रकाशक : वैभवशाली, दिल्ली
मूल्य : 25 रुपये

अमर गोस्वामी की खासी चुस्त-दुरुस्त बाल कथाओं की एक अलग पहचान है, जिनमें हास्य के मनोरम छींटे हैं। ‘शेरसिंह का चश्मा’ उनकी ऐसी ही मजेदार बाल कहानियों का सुंदर और पठनीय संग्रह है। इसमें ‘शेरसिंह का चश्मा’, ‘खुशबू की ताकत’, ‘सुपर पावर से टक्कर’ जैसी कहानियों में शिष्ट हास्य के बड़े सुंदर नमूने हैं। इनमें ‘शेरसिंह का चश्मा’ तो अद्भुत हास्य-कथा है। जंगल के राजा शेर को बुढ़ापे के कारण कुछ कम दिखाई देने लगा। नजर कमजोर हो जाने के कारण वे खरगोश को चूहेराम समझ लेते हैं, ढेंचूराम को डंपी कुत्ता और लाली बंदर को गिलहरी। मगर लाली बंदर आखिर उनके लिए चश्मा ढूँढ़ लाया और शेर के लिए सही नंबर का चश्मा लाने में क्या-क्या कमाल हुए, यह इस बड़ी ही नाटकीय कहानी ‘शेरसिंह का चश्मा’ को पढ़कर जाना जा सकता है। ‘खुशबू की ताकत’ में फूल को नाचीज समझकर हँसने वाले घमंडी हाथी की कैसी दुर्गति होती है, इसे अमर गोस्वामी ने एक मीठी हास्य-कथा में ढालकर सामने रखा है।

18

किताब : शिब्बू पहलवान (उपन्यास)
लेखक : क्षमा शर्मा
प्रकाशक : ईशान प्रकाशन, नई दिल्ली
मूल्य : 16 रुपये

क्षमा शर्मा ने बच्चों के लिए खूब लिखा है और खूब रमकर लिखा है। उनके बाल उपन्यासों का अलग ही रंग है। ‘शिब्बू पहलवान’ क्षमा शर्मा का खासा दिलचस्प उपन्यास है, जिसके नायक हैं शिब्बू पहलवान। लेकिन शिब्बू पहलवान सिर्फ पहलवान ही नहीं, वे और भी बहुत कुछ हैं। उपन्यास में शिब्बू पहलवान की बहादुरी और पहलवानी दावँ-पेच के अलावा उनकी दयालुता, सरलता, खुद्दारी और स्वाभिमान की भी एक से बढ़कर एक ऐसी झाँकियाँ हैं, जो मोह लेती हैं। बलवान वे इतने बड़े हैं कि जहाँ भी वे दंगल में जाते हैं, पहला इनाम जीतकर लाते हैं। पर दिल इतना कोमल कि किसी का भी दु:ख-दर्द देख नहीं पाते और उसकी मदद के लिए जी-जान से जुट जाते हैं। उपन्यास का अंत खासा रोमांचक है और देर तक मन पर उसकी छाप बनी रहती है। बेशक शिब्बू पहलवान ऐसा उपन्यास है कि एक बार पढऩे के बाद भुलाया नहीं जा सकता।

19

किताब : एक सौ एक कविताएं (कविता)
लेखक : दिविक रमेश
प्रकाशक : मेट्रिक्स पब्लिशर्स, दिल्ली
मूल्य : 200 रुपये

दिविक रमेश उन कवियों में से हैं जिन्होंने बच्चों के लिए बिल्कुल अलग काट की कवितायें लिखी हैं। पिछले कोई तीन दशकों में लिखी गई उनकी कविताओं में से चुनी हुई एक सौ एक कविताएँ इस पुस्तक में शामिल हैं, जिनमें दिविक की कविता का हर रंग और अंदाज है। यही नहीं, पुस्तक में बहुत-सी कवितायें चकित करती हैं कि अच्छा, बच्चों के लिए भी यह सब कहा जा सकता है और इतनी सहजता से कहा जा सकता है! खासकर ‘घर’, ‘जी करता जोकर बन जाऊँ’, ‘थकता तो होगा ही सूरज’, ‘अगर पेड़ भी चलते होते’, ‘सुंदर माँ का सुंदर गाना’,  ऐसी कवितायें हैं जिनमें बच्चे रमते भी हैं और जिनके जरियें नई दुनिया की नई हकीकतों से भी परिचित होते हैं।

20

किताब : लड्डू मोती चूर के (कविता)
लेखक : रमेश तैलंग
प्रकाशक : ग्लोरियस पब्लिशर्स, नई दिल्ली
मूल्य : 150 रुपये

‘लड्डू मोतीचूर के’ रमेश तैलंग के एक सौ एक शिशु गीतों का अद्भुत गुलदस्ता है। सभी बालगीत ऐसे कि आप पढ़ते जायें और मंद-मंद मुसकराते जाएँ। सभी में बच्चों की दुनिया की कोई अलग शक्ल, अलग बात है। पर साथ ही एक मीठी गुदगुदी भी है, जिससे ये गीत पढ़ते ही हर बच्चे की जबान पर नाचने लगते हैं। रमेश तैलंग एक छोटे से बालगीत में बहुत कुछ कह देने की कला में माहिर हैं। इस संग्रह में शामिल ‘डुगडुग डंडा डोली’, ‘पानी पीने आई चूं-चूं’, ‘निक्का पैसा’, ‘गिरस्थी’, ‘हँसा कीजिए’, ‘लड्डू मोतीचूर के’ और ‘पापा की तनख्वाह’ में पढ़कर तो लगने लगता है कि रमेश तैलंग ने बाल मन का कोना-कोना छान लिया है।



8 comments on “हिंदी बाल साहित्य की 20 सर्वश्रेष्ठ किताबें : प्रकाश मनु

  1. भले ही कुछ किताबों को लेकर मतभिन्‍नता हो सकती है, किन्‍तु इस तरह के प्रयास सराहनीय हैं। इससे बात साहित्‍य की स्‍तरीय पुस्‍तकों के बारे में जानकारी मिलती है और उन्‍हें पढने की उत्‍कंठा जागृत होती है। इस सराहनीय कार्य के लिए मनु जी बधाई के पात्र हैं। साथ ही आपका भी आभार, इन्‍हें उपलबध कराने के लिए।

    ——
    नई दृष्टि, नई सोच से खाली है आज का बालसाहित्‍य।
    कुछ महाभाटों ने किया बाल साहित्‍य का नुकसान: प्रकाश मनु।

  2. sumit says:

    bal divas ke avsar pe Baccho se sambandhit kitabon ke bare me padh ke accha laga….aur ye mera durbhagya h ki maine inme se koi kitab nahi padi hai

  3. 'manohar chamoli 'manu says:

    अच्छी जानकारी है…इतना बटोरकर लेने वाले प्रकाश मनु जी का आभार. चुनकर लायें हैं तो हो सकता है कुछ जंचा न होगा और कुछ छुट भी गया होगा.

  4. अवैद्यनाथ दुबे says:

    बचपन के दिनों में इन पुस्‍तकों के बारे में जानकारी मिल जाती, तो कॉमिक्‍स और वीडियो गेम्‍स के चस्‍के से बच गया होता। वैसे, अपनी बिटिया को ये किताबें जरूर दूंगा पढने को।

  5. PUKHRAJ JANGID पुखराज जाँगिड़ says:

    अच्छी बाल रचनाएं एकत्रण के लिए आभार।
    एक जिज्ञासा – ‘अच्छे’ साहित्य की ही तरह क्या ‘अच्छा’ बाल साहित्य सिर्फ और सिर्फ दिल्ली में ही प्रकाशित होता है?
    सादर।

  6. Prakash ji ko saadhuvaad is prayaas ke liye. Waise kuch ek kitaabein shayad aur hain jo judni chahiye isme, jaise ki – Jhagda Niptaarak daftar (Suryabala), Bachpan ki Yaad Rahi Kahaniyan (Shivani). Lekin aapka prayaas nishchay hi saraahneeya hai.
    Sadhanyavaad,
    Siddhartha Rastogi

  7. Dr.Chandramani Jha says:

    I want to buy all children’s novels mentioned above.Pl.send me at once.Dr.Chandramani JhaShivsagar,L.Sarai,Darbhanga,Bihar,Pin ८४६००१,M.No.९४३०८२७७९५,drchandramanijha@gmail.com

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