शिक्षा की डिजिटल पहल

डि‍जि‍टल यात्रा के बारे में बताते प्रथम के सह-संस्थापक डॉ. माधव चह्वाण।

नई दिल्ली :  शिक्षा क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठनों में शुमार- प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन ने 29 अगस्त 2017 को शिक्षा सम्बंधी अपनी डिजिटल पहल का औपचारिक उद्घाटन किया। प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के चेयरमैन अजय पीरामल ने ‘प्रडिजि’ नाम से शुरू की जा रही इस पहल को नई दिल्ली स्थित विश्व युवा केंद्र में जारी किया।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रथम की सीईओ डॉ. रुक्मिणी बनर्जी ने कहा कि प्रथम ने पिछले लगभग 20 वर्षों के अपने कार्यकाल में बगैर डिजिटल संसाधनों ही काम किया है। लेकिन नई टेक्नोलॉजी की असीमित पहुंच और घटती कीमतों को देखते हुए अब समय आ गया है कि हम इसकी संभावनों को तलाशने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि स्कूली संसाधनों में वित्तीय निवेश बढ़ा देने भर से बच्चों की शैक्षिक उपलब्धियों में सुधार नहीं होता। प्रथम की सालाना असर (एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट) रिपोर्ट पिछले 12 वर्षों से इस तथ्य की पुष्टि कर रही है। इसलिए बेहतर शिक्षा के लिए प्रथम अब टेक्नोलॉजी के विभिन्न माध्यमों का परीक्षण करना चाहता है। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और विकास में इन माध्यमों की क्षमताओं का तुलनात्मक अध्ययन भी किया जाएगा।

इस मौके पर फाउंडेशन के चेयरमैन अजय पीरामल ने प्रडिजि ऐप भी जारी किया जो फिलहाल 11 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए इसमें 20 अलग-अलग शैक्षिक गेम डाले गए हैं, जो हिंदी व अंग्रेजी के अलावा पंजाबी, असमी, बांग्ला, उड़िया, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मराठी और गुजराती में उपलब्ध हैं। संभवतः यह पहला मौका है, जब किसी भारतीय गैर-सरकारी संगठन ने इतनी सारी भारतीय भाषाओं में एक साथ शिक्षा सम्बंधी संसाधनों को तैयार किया है। प्रथम इन संसाधनों को समूचे देश में नि:शुल्क बांटना चाहता है। वह चाहता है कि विभिन्न स्तरों पर सरकारें, संस्थाएं, शिक्षण संस्थान, स्वयंसेवी संस्थाएं, समुदाय व परिवार प्रथम के डिजिटल कंटेंट का लाभ उठाएं। आज प्रडिजि प्ले-स्टोर पर उपलब्ध है। इसी तरह यह एक-स्टेप के प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध होगा।

प्रथम की नई डिजिटल पहल के तीन आयाम हैं। पहला, डिजिटल गेम्स व गतिविधियों सहित बच्चों के सीखने के लिए नए शैक्षिक संसाधनों का सृजन। दूसरा, बच्चों के लिए वीडिओ का निर्माण और तीसरा, डिजिटल पहल के वास्तविक प्रभावों का मूल्यांकन। इस लक्ष्य के लिए 21 राज्यों में करीब 12,000 टेबलेट बांटे गए हैं, जो आगामी 12 महीनों के दौरान लगभग 7,000 गांवों व शहरी बस्तियों में इस्तेमाल किए जाएंगे। स्कूलों में चलाए जा रहे डिजिटल शिक्षा के अन्य प्रयोगों के विपरीत प्रथम की पहल घरों व बस्तियों में संपन्न होगी और माताएँ टेबलेट की संरक्षक बनाई जाएंग। जब बच्चे सीखना चाहेंगे, तब माताएँ ही  उन्हें टेबलेट देंगी। इस पहल के अंतर्गत समूह आधारित शिक्षा व स्व-शिक्षण के अलावा बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में परिवार, ख़ास तौर पर मां, भाई-बहनों व परिवार के अन्य सदस्यों की भागीदार जैसी बातों को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस मौके पर प्रथम के सह-संस्थापक डॉ. माधव चह्वाण ने कहा कि यह हमारी डिजिटल यात्रा की शुरुआत भर है; निसंदेह आगामी महीनों में कई सफलताओं व असफलताओं से भी सामना होगा। लेकिन यह जानना बहुत ज़रूरी है कि किस किस्म का डिजिटल कंटेंट बच्चों में सीखने की तल्लीनता पैदा करता है। एक बार बच्चे तल्लीन हो जाते हैं तो वे सीखने की उत्सुकता और उत्साह से भर जाते हैं। अगर वे उत्साहित नहीं हैं तो उनमें सीखने की प्रेरणा भी नहीं होगी। एक बार वे प्रेरित हो गए तो वे कई बाधाएं पार कर सकते हैं और जो चाहें सीख सकते हैं। प्रडिजि के पीछे मुख्य विचार यही है। डॉ. चह्वाण ने बताया कि प्रथम की डिजिटल पहल का दूसरा प्रमुख पहलू सभी भारतीय भाषाओं में पाठ्य सामग्री तैयार करने के लिए साझेदारियां विकसित करना भी है ताकि सभी बच्चों को नए-नए खेल और शैक्षिक गतिविधियों की निर्बाध आपूर्ति जारी रहे।

प्रडिजि के उद्घाटन पर सभी आगंतुकों व मेहमानों को नए ऐप को देखने व इसमें डाले गए गेम्स व गतिविधियों को डिजिटल उपकरणों पर परखने का मौका भी दिया गया। फिलहाल प्रथम की डिजिटल पहल को गूगल और सर्व मंगल परिवार ट्रस्ट का सहयोग प्राप्त है। इसके अलावा रिगली कंपनी फाउंडेशन ने भी इस प्रयास में मदद की है।

कार्यक्रम के दौरान ऐप देखते आगंतुक।

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