मार्कण्‍डेय वर्तमान को बदलने वाले कहानीकार : रवि‍भूषण

मार्कण्डेय की पुस्तकों का वि‍मोचन करते प्रणय कृष्ण, दूधनाथ सिंह, शेखर जोशी, राजेन्द्र कुमार और रवि‍भूषण।

 

इलाहाबाद/नई दि‍ल्‍ली : प्रसिद्ध कहानीकार मार्कण्‍डेय की जन्‍मतिथि पर 2 मई को इलाहाबाद में म्‍यूजि‍म हॉल में दोपहर 2.30 बजे से आयोजित कार्यक्रम में लोकभारती से प्रकाशित मार्कण्‍डेय की कहानियों का संग्रह ‘हलयोग’ तथा ‘कल्‍पना’ पत्रिका में ‘चक्रधर’ के नाम से ‘साहित्‍यधारा’ स्‍तम्‍भ में लिखी टिप्‍पणियों के संकलन ‘चक्रधर की साहित्‍यधारा’ का विमोचन प्रख्‍यात कहानीकार शेखर जोशी ने किया।

इस अवसर पर ‘कहानीकार मार्कण्‍डेय’ विषय पर आयोजि‍त संगोष्‍ठी में में राँची से आये आलोचक रविभूषण ने कहा कि उनके सम्‍पादक, स्‍तम्‍भकार, आलोचक एवं कवि रूप को समझे बिना मुकम्‍मल बात नहीं हो सकती। मार्कण्‍डेय की कहानियों की चेतना में किसान हैं। वह किसान को भारत की संस्‍कृति और परम्‍परा का मूल केन्‍द्र मानते हैं। मार्कण्‍डेय नेहरूबियन आधुनिकता की तरह की आधुनिक कहानियाँ लिखने वाले नहीं थे। वह जमीनी हकीकत के कहानीकार हैं। उनके यहाँ पुराना और नया दोनों ही महत्‍वपूर्ण है। वह वर्तमान को बदलने वाले कहानीकार हैं। इस क्रम में उन्‍होंने मार्कण्‍डेय की कहानी ‘साबुन’, ‘जूते’, ‘दूध’ और ‘दवा’ कहानी की चर्चा की।

आलोचक राजेन्‍द्र कुमार ने कहा कि मार्कण्‍डेय सोद्देश्‍य कहानियाँ ही लिखते थे। इनकी ग्रामीण कथानकों की कहानियों में ‘नास्‍टेल्‍जिया’ नहीं है, बल्‍कि ठोस यथार्थ है।

कथाकार दूधनाथ सिंह ने कहा कि मार्कण्‍डेय की कहानियों में व्‍यक्‍तित्‍व और यथार्थ का अन्‍तर्विरोध है, जो उन्‍हें बड़ा कहानीकार बनाता है।

अध्‍यक्षता करते हुये शेखर जोशी ने कहा कि मार्कण्‍डेय की दो पुस्‍तकें प्रकाशित होना एक महत्‍वपूर्ण ऐतिहासिक कार्य हुआ है। कहानियों पर उन्‍होंने कहा कि मार्कण्‍डेय की कहानियों में एक फादर फिगर है जिसकी समाजिक अवस्‍थिति का मूल्‍याँकन वर्तमान पीढ़ी करती है।

कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत मार्कण्‍डेय की पत्‍नी विद्यावती द्वारा दीप-प्रज्‍वलन के साथ हुई। वक्‍ताओं का स्‍वागत रमेश ग्रोवर ने किया। कार्यक्रम का संचालन बलभद्र ने कि‍या तथा धन्‍यवाद लोकभारती के संचालक-प्रबन्‍धक आमोद माहेश्‍वरी ने कि‍या। इस अवसर पर कामरेड जिला उल हक, अली अहमद फातमी, प्रणय कृष्‍ण, जीपी मिश्र, हिमांशु रंजन, संतोष भदोरिया, केके पाण्‍डेय, अविनाश मिश्र, अरिन्‍दम तथा मार्कण्‍डेय के परिजनों में उनके पुत्र सौमित्र, पुत्री सस्‍या, दामाद चैतन्‍य आदि उपस्‍थित थे।

इसी अवसर पर नई दि‍ल्‍ली में साहित्‍य अकादेमी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रख्‍यात समालोचक नामवर सिंह और मैनेजर पाण्‍डेय ने मार्कण्‍डेय द्वारा शुरू की गई ‘कथा’ पत्रिका के मीराबाई पर केन्‍द्रित अंक का विमोचन किया। ‘हलयोग’ और ‘चक्रधर की साहित्‍यधारा’ का विमोचन भी किया गया। ‘आज के सन्‍दर्भ में मीरा’ वि‍षय पर आयोजि‍त संगोष्‍ठी में नामवर सिंह ने कहा कि‍ मीरा पर आलोचना कम लि‍खी गई क्‍योंकि‍ मीरा स्‍वयं स्‍पष्‍ट हैं। जो सीधा, सरल और सहज है, उस पर आलोचना लि‍खना कठि‍न होता है। उन्‍होंने कहा कि‍ मीरा की बातें आत्‍मा से नि‍कलती हैं और वह बार-बार नारी की मुक्‍ति‍ की बातें करती हैं।

आलोचक मैनेजर पाण्‍डेय ने कहा कि मीरा ने राजसत्‍ता, पुरुषसत्‍ता, लोकसत्‍ता, कुलसत्‍ता को बार-बार चुनौती दी थी। उनके लि‍ये भक्ति‍, मुक्‍ति‍ की साधन थी। आलोचक वि‍श्‍वनाथ त्रि‍पाठी ने कहा कि‍ मीरा नारी चेतना की नेता नहीं, प्रेरणा हो सकती हैं। कहानीकार अब्दुल बिस्मिल्लाह, कवयि‍त्री अनामि‍का आदि‍ ने भी संगोष्‍ठी को सम्‍बोधि‍त कि‍या। संचालक देवीशंकर नवीन ने कि‍या। साहि‍त्‍य अकादेमी के उपसचि‍व ब्रजेन्‍द्र त्रि‍पाठी ने स्‍वागत कि‍या और ‘कथा’ के सम्‍पादक अनुज ने धन्‍यवाद दि‍या। इस अवसर पर मार्कण्‍डेय की बेटी और कथा की प्रबन्‍ध सम्‍पादक स्‍वास्‍ति सिंह भी उपस्‍थित रहीं।

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