बड़े काम की चाय की प्याली

मैं सोया हुआ था। श्रीमतीजी ने हिलाया, ”आफिस नहीं जाना क्या? लिहाफ तान कर सोए हुए हो।ÓÓ
मैंने अंगड़ाई ली, ”आज चाय नहीं मिलेगी?ÓÓ
”लाई हूं, तुम्हारी चाय की प्याली। उठो तो सही।ÓÓ श्रीमतीजी ने कहा।
मैंने लिफाह से मुंह बाहर निकाला, ”मेज पर रख दो।ÓÓ
वह चाय की कप मेज पर रख कर चली गई।
मुझे झपकी लग गई। पांच-सात मिनट बाद आंख खुली। मैंने आवाज दी, ”सुनो जी, चाय तो कोल्ड डिं्रक हो गई है। इस गरम तो कर दो।ÓÓ
वह चाय गरम करके ले आई। मैं चाय पीकर बाथरूम में घुस गया।


मैंने नाश्ता किया। चाय पहले ही खत्म कर चुका था। मन भरा नहीं था। मैं मुस्कराते हुए बोला, ”बहुत तेज ठंड पड़ रही है। चाय पीने का पता ही नहीं चला। एक कप चाय और मिल जाती तो…ÓÓ
वह उठी और गाल थपाकर चाय बनाने चली गई।

मैं आफिस पहुंचा। काम करने का मन नहीं कर रहा था। ठंड भी लग रही था। चपरासी को पैसे देते हुए कहा, ”जा जल्दी एक कड़क चाय बनवाकर ला।ÓÓ
चाय पीकर मूड फ्रेश हो गया। मैं काम में जुट गया।
दोपहर को मनोज आ गया। पास की बिल्डिंग में उसका आफिस है। बस में साथ आते-जाते हुए मित्रता हो गई। कभी-कभी मिलने आ जाता है। मैंने चपरासी को आवाज दी, ”दो कटिंग मलाई मार के, जल्दी।ÓÓ
मनोज ने कहा, ”अरे यार, तकल्लुफ क्यों कर रहे हो?ÓÓ
मैंने जवाब दिया, ”इसमें तकल्लुफ की क्या बात है? चाय पीते-पीते गपियाते हैं। यह बता, साथ में कुछ मंगाऊ?ÓÓ
मनोज ने सिर हिलाकर मना कर दिया। मैंने चपरासी को जाने का इशारा कर दिया।
मनोज जाने लगा। बोला, ”यार, किसी दिन घर आ। एक-एक कप चाय पिएंगे और गपशप करेंगे।ÓÓ
मैंने कहा, ”जल्द ही आऊंगा।ÓÓ

काम करते-करते बोरियत होने लगी। मैंने चपरासी से कहा, ”एक कप चाय मिलेगी?ÓÓ
”जी साहब।ÓÓ कहकर वह स्टूल से खड़ा हो गया।
मैं पैसे देते हुए बोला, ”अपने लिए भी ले आना।ÓÓ
वह खुशी से बोला, ”ये गया, ये आया, दो प्याला चाय अभी लाया।ÓÓ

आफिस की छुट्टी होने में एक घंटा था। काम खत्म हो गया था। मैं घूमते-घूमते एकाउंट सेक्शन में चला गया। वहां खुशी का माहौल था।
मैंने पूछा, ”शर्माजी क्या बात है? हर कोई खुश दिखाई दे रहा है।ÓÓ
वह बोले, ”बड़े बाबू का इंक्रीमेंट हो गया है।ÓÓ
मैंने बड़े बधाई दी, ”बड़े बाबू चाय हो जाए।ÓÓ
”क्यों नहीं।ÓÓ बड़े बाबू ने चपरासी को पैसे दिए, ”सबके लिए समोसा भी ले आना।ÓÓ
गरमा-गरमा चाय-समोसे ने खुशी और बढ़ा दी।

तीन-चार दिन से विक्रम चौधरी के घर जाने की सोच रहा था। वह पहले हमारे मोहल्ले में रहते थे। करीब पंद्रह दिन पहले उनकी मां का देहांत हो गया। मैं उनके घर नहीं जा पाया था। रोज आजकल-आजकल में टल रहा था। सोचा कि आज उनसे मिलता ही जाऊं। मैं चौधरी साहब के घर चला गया। थोड़ी देर बाद चलने को हुआ तो चौधरी साहब ने मेरा हाथ पकड़कर बैठा लिया, ”बैठो, ऐसे कैसे जा रहे हो? चाय आती ही होगी। पीकर जाना।ÓÓ
मैं बैठ गया। उन्होंने पत्नी को आवाज दी, ”चाय हो गई या बीरबल की खिचड़ी। जल्दी लेकर आओ।ÓÓ
”अभी लाई।ÓÓ भाभीजी रसोई से बोलीं।
हम बात करने लगे। चौधरी साहब अपनी मां से जुड़े प्रसंग सुनाने लगे। माहौल गंभीर हो गया। भाभीजी चाय लेकर आईं। मैंने कहा, ”इसकी क्या जरूरत थी?ÓÓ
वह मुस्कराईं, ”कभी-कभी तो आते हो। ऐसे कोई अच्छा लगता है।ÓÓ
चाय की भाप के साथ ही गंभीरता भी उड़ गई और माहौल सहज हो गया।

शाम को घर आया। श्रीमतीजी ने फरमान जारी कर दिया, ”सब्जी नहीं है। बाजार से ले आओ। तभी खाना बनेगा।ÓÓ
मैंने कहा, ”थकान लग रही है। एक कप चाय मिल जाती तो…ÓÓ
वह चाय बनाकर ले आई। मैं जल्दी-जल्दी पीने लगा।
वह बोली, ”आराम से पीओ, गरम है।ÓÓ
चाय पीकर मैंने खुद को तरो-ताजा महसूस किया। मैं बाजार चला गया। रास्ते में राजेश मिल गया। मिलते ही लिपट गया, ”कहां रहते हो, बरखुरदार? कई दिनों से घर नहीं आए।ÓÓ
”कहीं नहीं यार। आफिस से छुटकारा मिले तो कहीं जाना हो।ÓÓ मैंने जवाब दिया।
”यह सब छोड़। आ, एक-एक कप चाय हो जाए।ÓÓ राजेश बोला।
वह चाय वाले छोकरे से बोला, ”दो कप चाय बनाना देसी अंदाज में, पानी रोक के, दूध ठोक के, मलाई मार के।ÓÓ
हम दोनों चाय पीने के साथ अपने-अपने गीत गाने लगे।

खाना खाकर मैं लेट गया। नींद नहीं आ रही थी। श्रीमतीजी रसोई का काम निपटाकर सोने के लिए आ गई।
मैंने मासूमियत से कहा, ”नींद नहीं आ रही है।ÓÓ
वह चुपचाप चली गई। थोड़ी देर बाद आई। उसके हाथ में चाय का प्याला था। वह मुस्कराते हुए बोली, ”लो आ गई, चाय की प्याली। अब तो नींद आ जाएगी।ÓÓ
मैं मुस्कराया और होंठों से लगा ली- चाय की प्याली।



6 comments on “बड़े काम की चाय की प्याली

  1. Vivek tyagi says:

    चाय के प्याले के साथ लेख का मजा आ गया।

  2. sumit says:

    सच घर घर का ……ये हम सबके घरों में रोजाना होता है।

  3. jyoti Verma says:

    बहुत बढिय़ा…मैं चाय नहीं पीती इतना। फिर भी बहुत मजा आया पढ़के।

  4. Harikrishan says:

    सच मैं अनुराग जी आपका लेख पढ़कर तो च्‍यास लग आई

  5. lata says:

    आप सच में बहुत अच्छा लिख रहे हैं।

  6. sanjay kapri says:

    वाह सुन्दर लेख….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *