फूलों की घाटी में एक दिन : प्रकाश मनु

वसंत ऋतु में खूबसूरत फूलों की घाटी में जाने का अवसर घर बैठे मि‍ल जाए तो मजा ही आ जाए। आइए, राजा हक्कू शाह के साथ सैर पर चलते हैं-
अगले दिन राजा हक्कू शाह अपने प्रमुख दरबारियों और सहायकों के साथ फूलों की घाटी देखने गए, तो शेर राजा बब्बू भी उनके साथ थे। राजा हक्कू शाह ने फूलों की घाटी के बारे में तरह-तरह की कहानियाँ सुनी थीं।
उन्होंने चलते-चलते रास्ते में शेर राजा बब्बू से पूछा तो उन्होंने कहा, ”आपने ठीक सुना है महाराज! वास्तव में फूलों की घाटी है ही इतनी सुंदर कि इसकी जितनी तारीफ की जाए, कम है। हम लोगों ने भी अपने पुरखों से सुना है कि यह फूलों की घाटी हजारों साल पुरानी है और इसकी सुंदर ऐसी ही अछूती है। सुना है कि पहले धरती पर वनदेवता रहा करते थे, तो उनका यही निवास था। उन्होंने अपने घर को मानो फूलों का घर बना लिया था और वही फूलों का घर यानी फूलों की घाटी मातुंगा जंगल का गौरव है और सारी धरती से यात्री और सैलानी यहाँ घूमने के लिए आते हैं।’’
सुनकर राजा हक्कू शाह मुस्कराते हुए बोले, ”अच्छा, तब तो इस फूलों की घाटी को देखकर मैं भी अपने आपको थोड़ा धन्य कर लूँ।’’
बातें करते-करते थोड़ी ही देर में वे मालिनी नदी के किनारे पर फैली फूलों की घाटी के प्रवेश-द्वार पर आ गए। सुगंधित हवा के झकोरों ने जैसे दूर ही घोषणा कर दी कि यही है फूलों की घाटी, यही!
राजा ने कुछ सोचते हुए कहा, ”हवाओं में कमल की सुगंध भी महसूस होती है। क्या यहाँ पास ही कमल सरोवर भी है?’’
शेर राजा बब्बू ने कहा, ”हाँ महाराज, आपने ठीक सोचा। फूलों की घाटी के बीच एक विशाल तालाब है, जहाँ कमल ही कमल खिलते हैं। एक नजर में वहाँ हजारों कमल नजर आते हैं। वे पानी में इस तरह सिर उठाए हँसते-मुस्कराते नजर आते हैं मानो प्रकृति का स्वागत-गीत गा रहे हों।’’
राजा हक्कू शाह अपनी मंडली और शेर राजा बब्बू के साथ फूलों की घाटी में आगे बढ़े, तो वहाँ चारों तरफ रंग-रंग के फूलों की ऐसी बहार नजर आई कि वे चकरा गए। बार-बार वे बब्बू राजा से पूछते, ”आपको इनके नाम पता हैं?’’ और बब्बू राजा मुस्कराते हुए जब उन फूलों के नाम और विशेषताएँ बता देते तो राजा हक्कू शाह का चेहरा खिल उठता।
फिर चारों ओर मधुर आवाजों के साथ-साथ उड़ते-फुदकते रंग-रंग के पक्षी भी फूलों की घाटी की सुंदरता को और बढ़ा रहे थे। राजा हक्कू शाह कुछ और आगे आ गए, तो सामने दिखाई दिया ‘हाथी द्वार’  जहाँ सात हाथियों ने आगे बढ़कर अपनी सूँड़ में पकड़ी हुई फूलों की मालाएँ राजा हक्कू शाह को पहनाईं।
कुछ आगे गए तो हृदय द्वार आया। यह फूलों की घाटी का सबसे अछूता हिस्सा था। यहाँ ऐसे अनोखे फूल थे कि राजा हक्कू शाह ने उनकी पहले कभी झलक तक नहीं देखी थी, उनके बारे में कभी सुना भी नहीं था। फूलों की घाटी का सबसे सुंदर दृश्य यहाँ नजर आ रहा था। तभी फूलों का मुकुट पहने हुए एक व्यक्ति आगे बढ़ा और राजा को तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूलों से बना अद्भुत गुलदस्ता भेंट किया। राजा हक्कू शाह हैरान। उन्हें लगा, कहीं यह वनदेवता तो नहीं? पर बब्बू राजा ने बताया, ”यह रामलु काका हैं। बचपन से ही हम इन्हें देखते आ रहे हैं। यहीं रहते हैं। फूलों की दुनिया का आनंद लेते हैं और इन्हें एक-एक फूल के बारे में पता है।’’
राजा हक्कू शाह कुछ आगे गए तो कमल सरोवर नजर आया, जिसमें हल्के गुलाबी रंगों के फूलों की ऐसी अपार छवियाँ नजर आईं कि राजा को लगा, पैर यहाँ से हिलना ही नहीं चाहते। पास ही श्वेात कुमुदनी के फूल थे। राजा कुछ और आगे गए, तो फूलों के सात द्वार आए, जहाँ सुंदर पुष्पित लताएँ खुद-ब-खुद प्रवेश-द्वार जैसी बन गई थीं।
राजा बब्बू शाह को लगा, जैसे बस वे हमेशा-हमेशा के लिए यहीं रह जाएँ, यहाँ से कहीं और न जाएँ। उन्हें थोड़ी सी लज्जा भी आई। सारी दुनिया उन्हें घुम्मी घुम्मा राज्य का राजा कहती है जिसकी शान मातुंगा जंगल की वजह से ही है। और मातुंगा जंगल उनकी राजधानी टमटमपुर से कोई ज्यादा दूर भी नहीं है। फिर भी उन्होंने आज तक कभी इसे पास आकर फुर्सत से देखा ही नहीं।
उन्होंने बब्बू राजा से मन की बात कही, तो वे हँसकर बोले, ”कोई बात नहीं महाराज, पर अब आपकी आँखों से सारी दुनिया इसे देखेगी।’’
राजा हक्कू शाह के साथ-साथ कमालदास भी चल रहा था। राजा ने कमालदास से कहा, ”सुनो कमालदास, तुम मातुंगा जंगल पर जल्दी ही एक किताब लिखो। अद्वितीय होनी चाहिए वह किताब। उसमें यहाँ का रोचक वर्णन हो और यहाँ के सुंदर दृश्यों के लाजवाब फोटो भी।’’
कमालदास ने हँसकर कहा, ”ठीक है महाराज। यहाँ से लौटते ही, मैं इसी काम में जुट जाऊँगा।’’
राजा हक्कू शाह फूलों की घाटी से लौटे तो बार-बार एक ही बात कह रहे थे हमें यूनेस्को में इस फूलों की घाटी का विवरण भेजना चाहिए। कमालदास की किताब पूरी हो तो उसे भी साथ ही भेज देंगे। मातुंगा जंगल को और सुंदर बनाने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे, ताकि दुनिया का सरताज बने हमारा प्यारा मातुंगा जंगल!
(मातुंगा जंगल की 51 अचरज भरी कहानियाँ से साभार)

3 comments on “फूलों की घाटी में एक दिन : प्रकाश मनु

  1. बहुत सुंदर लगी आप की यह फ़ूलो की घाटी जी, धन्यवाद

  2. बहुत ही प्‍यारी कहानी है। प्रकाश मनु जी को हार्दिक बधाई।

  3. chainsingh says:

    कहानी बुहत अच्‍छी लगी है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *