प्रेमचंद के बहाने समय-समाज को समझने की कोशि‍श  

रा.इ.का. टोटनौला में दीवार पत्रिका ‘नवांकुर’ के प्रेमचंद अंक का विमोचन किया गया।

पि‍थौरागढ़ : प्रेमचंद जयंती तथा उसकी पूर्व संध्या पार उनको याद करते हुए जगह-जगह विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसका उद्देश्य प्रेमचंद के बहाने अपने समय और समाज को जानना-समझना और पढ़ने की संस्कृति को आगे बढ़ाना रहा। इस बार पिथौरागढ़ में आरम्भ स्टडी सर्किल, रचनात्मक शिक्षक मंडल और लोकतान्त्रिक साहित्य-संस्कृति मंच द्वारा प्रेमचंद जयंती को एक अलग अंदाज में मनाया गया। प्रेमचंद जयंती की पूर्व संध्या पर एक ‘कथा चौपाल’ का आयोजन किया गया। इसके न किसी को औपचारिक आमंत्रण पत्र दिए गए, न किसी को अध्यक्षता के लिए कहा गया और न ही कोई मुख्य वक्ता तय किया गया। कथा पाठ हुआ। उसके बाद उपस्थित लोगों ने बिना किसी औपचारिकता के कहानी को लेकर अपनी-अपनी बात रखी। गिर्दा के जनगीतों से कार्यक्रम की शुरुआत और समापन हुए। लोग उसके बात भी चर्चा-परिचर्चा करते हुए देखे गए।

कार्यक्रम का एक विहंगम शब्द-चित्र ‘बाखली’ के संपादक गिरीश चन्द्र पाण्डेय ने अपने फेसबुक वाल पर कुछ यूँ खींचा है- बरसात का दिन, राम लीला फिल्ड,और मुंशी प्रेमचंद जयंती का पूर्व दिन शाम के साढ़े चार बजे के आसपास बरसात का रुक जाना और आरम्भ स्टडी सर्कल के कुछ युवा साथी अपने पोस्टरों और किताबों से भरे झोलों के साथ बाहर निकलते हैं। साथ में विनोद उप्रेती, राजीव जोशी, कमलेश उप्रेती, चिंतामणि जोशी, किशोर पाटनी, दिनेश भट्ट आदि का ओपन थियेटर की ओर आना पिथौरागढ़ के माहौल में आ रहे परिवर्तन की ओर इंगित कर रहा था। बस कुछ ही पलों में पोस्टर लहराने लगे और एक मेज पर सज गई थीं कुछ स्थूल और कुछ कृसकाय किताबें। अब तक कुछ भी तो नहीं था, दो-चार लोगों के सि‍वाय।लग रहा था कि‍ बस इतने ही लोग क्या बोलेंगे। क्या सुनेंगे। क्या विचार-विमर्श होगा। कुछ ही देर में महेश पुनेठा आदि का आना और सीढ़ियों पर बैठ जाना । एक-एक कर संख्या का बढ़ते जाना। और बिना औपचारिकता के आरम्भ के साथियों के संचालन में गिर्दा के जनगीत के साथ प्रेमचंद की दो बैलों की कथा का अभिनयात्मक वाचन । थोड़ी ही देर में शिक्षकों और छात्रों के समूह से सामने की सीढ़ियां भर गईं। थोड़ी दूर पर बैठे कुछ बच्चे पहले कुछ मजाकिया मूड में थे, कहानी के उतार-चढ़ाव के साथ खुद को जोड़ने से रोक नहीं पाए। चुपचाप आए और पीछे बैठ गए और कहानी में लीन हो गए। तहसील परिसर की दीवार पर कुछ लोग जो ऐसे ही खड़े थे, दीवार के सहारे खड़े होकर हीरा और मोती की बातें ऐसे सुन रहे थे मानो अपने गांव की सैर में चले गए हों। बीच-बीच में बज रहीं मोबाइल की घण्टियों से ऐसा लग रहा था मानो थियेटर में पार्श्व संगीत चल रहा हो। करीब पौन घण्टे चली कहानी अब पूर्णता की ओर थी । आखिर कहानी पूरी हुई । युवा संचालक का बातचीत को आगे बढ़ाना । खुले मंच को अपने विचारों को साझा करने को कहना । किसी कहानी को कौन किस तरह किन कोणों से पढ़ता और समझता है, कितना अपने से और समाज से जोड़ पाता है, तत्कालीन समाज और समय और आज के परिपेक्ष्‍य में कहानी उपादेयता, पात्रों का गठन और उनकी उपयोगिता पर खुल कर चर्चा परिचर्चा हुई । खास बात यह थी की बोलने वालों में सबसे मुखर युवा और बच्चे थे । सभी ने यह माना कि यह खुली चर्चा शहर में पढ़ने और पढ़ाने की संस्कृति को विकसित करने के लिए एक सार्थक पहल है। यह लगातार होनी चाहिए। रचनात्मक शिक्षक मंडल का योगदान भी सराहनीय रहा। युवाओं को अगर सही मर्गदर्शन मिले तो शहर की फिजा बदल सकती है। युवाओं का यह जोश भविष्य के प्रति आश्वस्त करता है। अंत में फिर जनगीत के साथ एक खूबसूरत खुले मंच का विसर्जन। और उसके बाद किशोर पाटनी, राजीव जोशी, चिंतामणि जोशी की औपचारिक बातें। कुल मिलाकर एक खूबसूरत शाम ।अब बारिश शुरू हो चुकी थी ।

कार्यक्रम में पोस्‍टर रहे आकर्षण का केंद्र।

इस कार्यक्रम के बारे में डीडीहाट से शामिल होने आए शिक्षक साथी कमलेश उप्रेती ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि कुछ बेहतर करने के लिए बहुत बड़े तामझाम की जरूरत बिल्कुल नहीं होती। लगन हो और नीयत साफ तो खुले आसमान के नीचे भी शानदार आयोजन हो सकता है। इसका उदाहरण है पिथौरागढ़ में कालेज में पढ़ने वाले युवाओं का एक रचनात्मक समूह ‘आरंभ स्टडी सर्कल’। कल महान भारतीय साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिन पर कथा चौपाल का अनौपचारिक आयोजन इन जोशीले युवाओं द्वारा किया गया। साथ में एक बुक स्टॉल भी, जहां पर प्रेमचंद साहित्य के साथ वैज्ञानिक विषयों पर किताबें खरीदने के लिए उपलब्ध, कितना सुखद है यह सब हमारे पिथौरागढ़ में हो रहा है।
कहानी ‘दो बैलों की कथा’ का वाचन नाटकीय संवाद शैली में किया गया तो आभास हुआ कि इस तरह सामूहिक वाचन से कथ्य के कितने सारे आयाम खुलते हैं!  दोस्तो, इस दौर में जब युवा राह चलते भी अपने स्मार्टफोन में घुसा रहता है, आपके किताब उठाकर सरेआम पचास लोगों को पढ़कर सुनाने के जज्बे को सलाम बनता है।

प्रेमचन्द जयंती की पूर्व संध्या पर रचनात्मक शिक्षक मण्डल रामनगर द्वारा एमपी इंटर कालेज में कार्यक्रम आयोजित किया गया । इस कार्यक्रम के बारे में कार्यक्रम के संयोजक नवेंदु मठपाल अपनी फेसबुक पोस्ट पर बताते हैं कि 38 विद्यालयों के 700 से अधिक बच्चे, मौका था प्रेमचन्द जयंती की पूर्व संध्या पर रचनात्मक शिक्षक मण्डल द्वारा एमपी इंटर कालेज में आयोजित कार्यक्रम का। ये बच्चे विगत एक महीने में 10 हजार बच्चों से विभिन्न तरीकों से कि‍ए गए सम्पर्क के परिणामस्वरूप आए। बोर्ड सचिव श्री वीपी सिमल्टी जी ने बतौर मुख्य अतिथि अपने स्कूली दिनों को प्रेमचन्द की कहानियों के बहाने याद किया, तो बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद कुमाउंनी साहित्यकार मथुरादत्त मठपाल जी ने भी वक्तव्य रखा। ललिता बिनवाल स्मारक समिति के अध्यक्ष बिनवाल जी, वरिष्ठ चित्रकार सुरेश लाल जी, रंगकर्मी रामपाल जी, कवि असगर जी, संजय रिखडी जी के नेतृत्व में भोर संस्था की नौजवान टीम के साथियों, अनेक प्रधानाचार्यों एसपी मिश्रा जी, राय जी, दिग्विजय सिंह जी, पुष्पा बुधानि जी, नलनी श्रीवास्तव जी, नीना सन्धु जी, जीतपाल जी के नेतृत्व में रोवर्स, रेंजर्स की टीम समेत 50 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं का रहा सक्रिय सहयोग। देघाट के शिक्षक साथी पाठक जी का विशेष धन्यवाद। बच्चों की एक टीम लेकर पहुंच गए।

अनौपचारि‍क कार्यक्रम में लोगों ने दि‍खाई खासी रुचि‍।

कार्यक्रम की शुरुआत भोर की टीम ने 1857 विद्रोह के प्रयाण गीत ‘हि‍म हैं इसके मालिक हिंदुस्तान हमारा’ एवं रामप्रसाद बिस्मिल के गीत ‘सरफरोशी की तमन्‍ना’ से हुई। प्रत्येक प्रतिभागी बच्चे को दिया गया- प्रेमचन्द साहित्य। आयोजक मण्डल द्वारा निकाली गई पुस्तिका ‘हमारी विरासत’ का भी विमोचन हुआ। कौन कहता है कि‍ बच्चे पढ़ना नही चाहते, शिक्षकों को तो सिर्फ वेतन और छुट्टी ही चाहिए। रचनात्मक मण्डल की टीम ने फिर गइस धारणा को गलत साबित किया।

गतवर्ष की भांति ही डॉ. डी.डी. पंत स्मारक बाल विज्ञान खोजशाला बेरीनाग में प्रेमचंद जयंती की पूर्व संध्या पर भव्य आयोजन किया गया। साथी कमलेश जोशी अपनी फेसबुक वॉल में बताते हैं कि  इस कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने प्रेमचंद की कहानियों पर पोस्टर बनाए, कहानियों का वाचन किया और नाटक किए। फ़िल्म ‘ईदगाह’ का प्रदर्शन भी किया गया। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष प्रेमचंद जयंती के अवसर पर यहाँ एक बालिका द्वारा प्रेमचंद की कहानी ‘दो बैलों की कथा’ का कुमाउंनी भाषा में किया अनुवाद काफी चर्चित रहा था।

प्रेमचंद जयंती की पूर्व संध्या पर अज़ीम प्रेमजी फाउन्डेशन, टीएलसी गरुड़ में भी कार्यक्रम आयोजि‍त हुए। इसके बारे में युवा लेखक बिपिन जोशी अपनी  फेसबुक वॉल पर कुछ इस तरह बताते हैं-  मुंशी प्रेमचंद जयंती की पूर्व संध्या पर अज़ीम प्रेमजी फाउन्डेशन, टीएलसी गरुड़ में कहानी वाचन एवम काव्य गोष्‍ठी का आयोजन किया गया। प्रेमचंद जी की मशहूर कहानी ‘बड़े भाई साहब’ का वाचन किया गया । कहानी पर सारगर्भित चर्चा की गई । उक्त कार्यक्रम में शिक्षक साथियों सहित उत्तराखण्ड के लोक साहित्यकार गोपाल दत्त भट्ट, मोहन चन्द्र जोशी, चन्द्र शेखर बडशीला, ओम प्रकाश फुलारा, वरिष्ठ पत्रकार आनंद बिष्ट तथा जिला शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए शिक्षक नीरज पन्त ने मुंशी जी के साहित्य पर उनके जीवन पर प्रकाश डाला। मुंशी जी के बहाने दलित साहित्य और नारी साहित्य पर भी बातचीत की गई । कहानी ‘बड़े भाई साहब’ का वाचन शिक्षक उमेश जोशी ने कि‍या।
कथा चर्चा के बाद कुमाउंनी लोक साहित्य के प्रख्यात हस्ताक्षर मोहन जोशी, वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल दत्‍त भट्ट, ओमप्रकाश फुलारा ने अपनी रचनाओं का पाठ कि‍या।
साहित्य गोष्‍ठी को एक महत्वपूर्ण रचनात्मक कार्यक्रम बताते हुए डीईओ आकाश सारस्‍वत ने प्रेमचंद की कालजयी रचनाओं की प्रसंगिकता पर विचार रखे।

कुमाउं  मंडल  के विभिन्न स्कूलों में भी प्रेमचंद जयंती अपने-अपने तरीके से मनाई गई।  रा.इ.का. देवलथल में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। दीवार पत्रिका ‘मनोभाव’ के प्रेमचंद विशेषांक का प्रधानाचार्य अनुज कुमार श्रीवास्तव ने लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि‍ प्रेमचंद का साहित्य हमें साम्प्रदायिकता, जातिवाद, क्षेत्रवाद जैसी संकीर्णताओं से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बच्चों द्वारा सम्पादित दीवार पत्रिका के इस विशेष अंक की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास अधिकाधिक होने चाहिए क्योंकि इससे बच्चों की रचनाशीलता और कल्पनाशीलता को नए आयाम मिलते हैं। इससे पूर्व कार्यक्रम का संचालन करते हुए दीवार पत्रिका के संपादक राहुल चन्द्र बड़ ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। शिक्षक रमेश चन्द्र भट्ट ने एक दि‍न पूर्व ‘प्रतिभा दिवस’ पर जूनियर कक्षाओं द्वारा तैयार की गई  दीवार पत्रिकाओं का बच्चों द्वारा समूहवार प्रस्तुतीकरण भी  किया गया।

इससे पूर्व प्रेमचंद जयंती पर कक्षावार निबंधों का पाठ किया गया। कक्षा-12 में उनके निबंध ‘प्राचीन और नवीन’ तथा कक्षा-10 में ‘आजादी की लडाई’ का वाचन किया गया। इन पर बच्चों ने लिखित रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी। कक्षा-9 के बच्चों के साथ प्रेमचंद की प्रमुख कहानियों की चर्चा करते हुए उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। बच्चों को बताया गया कि कहानियां हमें केवल आनंद ही नहीं प्रदान करती हैं, बल्कि वे जिस कालखंड में रची गयी होती हैं, उस समय और समाज के बारे में बहुत कुछ बताती हैं।जैसे- प्रेमचंद के साहित्य को पढ़ते हुए वे आजादी की लडाई के बारे में तथा उस समय के समाज के बारे में बहुत कुछ जान और समझ सकते हैं। इससे हमारी भाषा भी मजबूत होती है। इसलिए पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ साहित्य की पुस्तकें भी पढ़ी जानी चाहिए। न केवल खुद, बल्कि दूसरों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसके लिए पुस्तकालय खोलने के अभियान से जुड़ने की बच्चों से अपील की गई।  बच्चों ने लिखित रूप से संकल्प व्यक्त किया कि वे अपने-अपने गांव में छोटे-छोटे पुस्तकालय स्थापित करने की कोशिश करेंगे। साथ ही वे प्रेमचंद की अगली जयंती तक उनकी अधिक से अधिक रचनाएँ पढ़ेंगे।

रा.इ.का. टोटनौला में शिक्षक-साहित्यकार चिंतामणि जोशी के मार्गदर्शन में दीवार पत्रिका ‘नवांकुर’ के प्रेमचंद अंक का विमोचन किया गया। उन्‍होंने अपनी फेसबुक वाल लि‍खा है कि‍ आज मास का अंत था और चौथे वादन के बाद दीवार पत्रिका समूह द्वारा ‘नवांकुर’ के प्रेमचंद विशेषांक के लोकार्पण व प्रेमचंद जयंती मानाने की योजना भी थी। सुबह विद्यालय पहुंचे तो रात भर के बाद भी बरसात जारी थी। बच्चे पिछले लगभग 15 दिनों से अपने ढंग से प्रेमचंद को जानने-समझने में लगे थे। इस माह दीवार पत्रिका के भी दो अंक तैयार कर चुके थे। विद्यालय में बृहद कक्ष है नहीं। तीसरे वादन तक भी मौसम नहीं खुला तो कक्षा 11अ के बच्चों ने अपनी कक्षा का फर्नीचर बगल के कक्ष में शिफ्ट कर कक्षा में दरिया बिछा दीं और शिक्षकों के लिए कुर्सियां डालकर प्रधानाचार्य जी को सूचित कर दिया कि कार्यक्रम होगा और कक्षा कक्ष में ही होगा। वाह! जहाँ चाह वहां राह।

दीवार पत्रिका संपादक मंडल ने मध्यांतर के बाद विद्यार्थियों को बिना बैग के छोटे से कक्ष में बिठा दिया। मुख्य संपादक कविता कापड़ी ने आवश्यक निर्देशों के बाद प्रेमचंद जयंती पर कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की कि नवांकुर का लोकार्पण, आलेख-कविताओं-कहानियों का वाचन, समीक्षा, प्रेमचंद के बहाने पढ़ने-लिखने की संस्कृति पर संवाद होगा और गणित अध्यापिका नीता अन्ना को बच्चों की ओर से विदाई भी दी जाएगी। कविता 100 बच्चों के भीतर स्व-अनुशासन रोपित कर चुकी थी।

प्रधानाचार्य कैलाश बसेड़ा जी के साथ श्रीमती अन्ना, पूनम, स्वाति व दीवार पत्रिका टीम ने नवांकुर का लोकार्पण किया। प्रधानाचार्य ने दीवार पत्रिका के महत्व को सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण मानते हुए बच्चों की खूब प्रशंसा की। छात्रा बबीता पाण्डेय ने स्वरचित कुमाउंनी कविता में प्रेमचंद की जीवनी और रचना संसार को व्यक्त किया। कमलेश पाण्डेय ने स्वरचित ‘प्रेमचंद जिन्होंने साहित्य में यथार्थ को निरूपित किया’ तथा आकांक्षा ने ‘प्रेमचंद की रचनाओं में स्त्री पक्ष’ आलेख का वाचन किया। तनुजा कापड़ी ने स्वरचित कहानी ‘शेरा की वापसी’ का पाठ कर सभी की संवेदना को झकझोरा। हिंदी शिक्षक राजेन्द्र बिष्ट, प्रकाश राम व विज्ञानं शिक्षक संतोष पन्त ने बच्चों को प्रेमचंद के विस्तृत रचना संसार की सैर कराई। मैंने प्रेमचंद के सम्बन्ध में बच्चों के प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं के समाधान का प्रयास किया। उन्हें प्रेरित किया कि अच्छा साहित्य पढ़ने की आदत विकसित कर कैसे वे बेहतर इन्सान बन सकते हैं।

बागेश्वर जनपद के गरुड़ विकासखंड में स्थित राजकीय जूनियर हाईस्कूल रौल्याना में नवाचारी शिक्षक साथी नीरज पन्त के निर्देशन में  प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर बच्चों ने मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’ और ‘पूस की रात’ का वाचन किया एवं कहानी के तत्वों पर चर्चा की।  ग्राम प्रधान मदन गिरी की अध्यक्षता में विविध कार्यक्रम हुए।

क्रि‍एटि‍व उत्‍तराखंड द्वारा रुद्रपुर में संचालित सृजन पुस्‍तकालय में भी प्रेमचंद जयंती पर कार्यक्रम आयोजि‍त कि‍या गया। इस अवसर पर प्रेमचंद की जीवन पर प्रकाश डाला गया और ईदगाह और दो बैलों की कहानी का वाचन कि‍या गया। इसके साथ कवि‍ता पाठ भी हुआ।

राजकीय इंटर कॉलेज खरसाड़ा पालगेट टि‍हरी गढ़वाल में आयोजि‍त कार्यक्रम में दो बैलों की कहानी और कई अन्‍य कहानि‍यों का वाचन और चर्चा हुई। साथ ही प्रेमचंद की भाषा, जीवन दर्शन और सामाजि‍क सरोकारों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का संचालन मोहन चौहान ने कि‍या।

राजकीय प्राथमि‍क वि‍द्यालय नवीन चौरसौ बागेश्‍वर में प्रेमचंद जयंती पर बच्चों ने दीवार पत्रिका ‘मन की बात’ तैयार की। मुख्य का आकर्षण प्रेमचंद की कहानियों का वाचन, जीवन परिचय, स्वरचित कहानी पाठ और चित्रांकन रहा। कार्यक्रम प्रधानाध्‍यापि‍का रीता जोशी की देखरेख में संपन्‍न हुआ।

प्रेमचंद जयंती पर आयोजि‍त कार्यक्रम में बड़ी संख्‍या में बच्‍चों की भागेदारी बहुत कुछ कहती है।

प्रस्‍तुति‍ : महेश चन्द्र पुनेठा

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