नि‍त्यानंद गायेन की कवि‍तायें

नि‍त्या’नंद गायेन

वि‍भि‍न्‍न राजनीति‍क और सामाजि‍क समस्याओं पर युवा कवि‍ नि‍त्यानंद गायेन की कवि‍तायें-

तेल पर खेल, जनता झेल

तेल पर खेल
जनता झेल
पूँजीपति सत्ता का
गजब मेल
महंगाई का है पेलम-पेल
बना फिर कार्टून
चला जा जेल
मांगों न कोई बेल (जमानत)
भोजन, पानी, बिजली
सबका मजा मुफ्त में ले
विरोध में
मानव श्रृंखला का
बना दे रेल

सरकार आज
बनी साहूकार
देश मच गया हाहाकार..

बिना सिर -पैर के

पूरा माहौल
कार्टून जैसा हो गया
दिल्ली से मुंबई तक
फिर उधर कोलकाता में भी
रोज बन रहे हैं
नये-नये कार्टून

कार्टूनिस्ट भटक गये हैं क्या ?
ममता जी से पूछिए
कितना दर्दनाक होता है
कार्टून में होना

सारी मर्यादाओं को तार-तार
बेरोजगार कार्टूनिस्ट बना रहे हैं
नित एक कार्टून
ताकि मिल जाये जेल की रोटियाँ
और खूब सारा नाम

अरे भाई
एक तरीका भी होता है
यह संसार का विशाल लोकतंत्र है
जानते हुए भी
आप कार्टून बनाते हैं
संसद में मारपीट करना
जूता-चप्पकल फेंकना
हंगामा करना, बिल की प्रति फाड़ना
रोज होता है
फिर भी कार्टून बनाते हैं लोग ?
हद हो गई यार …

अब मैं नही देखता
टाम एंड जैरी शो
देखता हूँ
लोक सभा,राज्य सभा टीवी
बंगाल न्यूज़ ….

बहुत याद आता हैं मुझे
आर के. लक्ष्म ण का आम आदमी…

‘असीम’ की भी एक सीमा है

असीम’ की भी
एक सीमा है
उसे थमना था
मान लिया
किन्तु ,
उन सबका क्या
जिन्होंने फहराए
तिरंगा
फिर कसमें भी खाईं
लेकर हाथ में संविधान कि
‘हम देश की अखंडता पर
न आने देंगे आँच,
नागरिकों के हित में
करेंगे काम ……..’
वे भूल गये सब कसमें, वादे
सत्मेव जयते का नारा
गुम हो गया
सांसदों के हल्ला–गुल्ला में
क्या नहीं यह अपमान ?
सच है ..
प्रतीकों से मिलता है बल
पर यहाँ
आदमी भी मर रहा है
इसे रखिये ध्यान में मित्रों
‘अपना चेहरा न बदला गया
आईने से खपा हो गये ?
लोकतंत्र में
राजद्रोह ?
इस पर भी सोचिये
राजा को भी खोजिये ..

जो खडे़ हैं पानी में

उन सब बुद्धिजीविओं ने
कई दिनों तक नहीं ली खबर
जो खड़े हुए हैं पानी में
खुद को बचाने के लिये

उन्हें खबर नहीं
गलते हुए पैरों की
सिकुड़ते हुए बदन की खाल

उन्हें बस चिंता है
ठाकरे ने क्या कहा सुषमा के बारे में

भारत सरकार
पड़ोसी को खुश करने में आमादा है
वीजा में अब ढील है
और वहाँ से भगाये गये परिवार
रो रहे हैं

इस पर सब चुप है
ताकि बनी रहे उनकी
धर्मनिरपेक्ष छवि

मैं चिंतित हूँ
पता नहीं क्यों

मुझे मालूम है
बहुत प्रश्नि उठेंगे
मेरी इस चिंता पर
और मैं शायद अब
न रहूँ धर्मनिरपेक्ष उनकी नज़रों में

पर, मुझे नहीं परवाह
अपनी छवि की
मैं पानी में गलते इंसानी माँस नहीं देख सकता
नहीं सह सकता मैं
अपनी जमीन से बेदखल
परिवारों की पीड़ा ..

अब कह लो जो कहना है तुम्हें
मेरी सोच पर
मुझे फर्क नहीं पड़ता

फिर भी क्यों नहीं होता हमें विश्वास ?

‘अघोरी’
जलते मानव शव का
खाता है माँस
फिर भी क्यों नहीं होता
हमें विश्वांस
ये साधु नहीं, दानव हैं ?

इंसान मर रहा है
घुट-घुट कर
तड़प-तड़प कर
वे कर रहे हैं पूजा
सांप, बंदर और चमगादड की

क्यों पहनते हैं कुछ
गेरुवा रंग के वस्त्र
और क्यों घूमते हैं कुछ
एक दम नग्न ?

शुद्र का प्रवेश
वर्जित क्यों है
तुम्हारे मंदिरों में
तुम तो करते हो
इंसानियत की बात ?

बहुत है सवाल
जवाब नही मिलता
कभी भी
ठीक-ठीक ..

18 comments on “नि‍त्यानंद गायेन की कवि‍तायें

  1. santosh alex says:

    achi kavithayeim hain

  2. जे. निर्मल कुमार says:

    नित्या नन्द जी की उपरोक्त सभी रचनाएँ त्रस्त व अभावग्रस्त भारतीय आम आदमी की वेदना को प्रतिबिम्बित करती हैं ! संसार के विशालतम गणतन्त्र में वर्तमान परिस्तिथियों का आकलन व प्रकाशन
    भारत की अस्मिता पर एक प्रश्नचिन्ह लगाता है ….पैंसठ वर्षों की क्या यही उपलब्धि है…और क्यूं ??
    निर्मल कुमार

  3. piyush says:

    aj so called India Bharat par bhari pad raha hai…. jukam india ko hota hai.. naak Bharat ko bahani padti hai… aam admi ki halat aisi ho gai hai ki pneumonia se bharat mar raha hai…aap apne shabdo se dawai dene ki koshish kar rahe hain… aapki shaili sahaj aur swabhawik hoti ja rahi hai.. jo ki badhiya hai…apni dawai k shabdo ko aur kadwa kijiye… Baba nagarjun ki or jayenge…

  4. DHEERAJ KUMAR says:

    ek achchhe aur sachche kavi ki yahi pahchan hai ki jab desh me kuchh anaitik aur gaalt ho raha ho to wo apni kalam se sabko jagaye aur sabe josh bhare.
    nityanand bhai ki kavitayen bhi waqt ke badlaw ki kasauti par khari utarti hain.

  5. नित्यानंद जी -एक कविता की कुछ पंक्तियाँ गंभीर अर्थ प्रतिध्वनित करती है ..लोकतंत्र में
    राजद्रोह ?
    इस पर भी सोचिये
    राजा को भी खोजिये .. वाह …….

  6. Sanjay says:

    sir ap ki kavitian aam admi k dard ko byaan krti h.
    dil ko chhu lene wali hoti h.
    ita true

  7. richa choudhary says:

    apne bhut sharhniy tarh se samsayaon ko uthaya hai…bhut khoob…

  8. Sanjay Jothe says:

    The last poem- ‘Aghori’ goes much deeper in the hidden conspiracies of religion, politics and even in literature… congrats Nityaji for this…

  9. सरोज कुमार says:

    कविताएं अच्छी हैं, वर्तमान राजनीति को पकड़ते और तीखा व्यंग्य करते हुए.

  10. शेषनाथ वर्णवाल says:

    नित्यानंद जी की कवितायेँ महज कवितायेँ नहीं हैं. ये सवाल खड़े करती है व्यवस्था पर. जो खुद को आधुनिकता और लोकतंत्र के सुन्दर लबादे में छूपाये है, पर अंदर से बर्बर और दुर्गंधता समेटे है. जहाँ आम इंसान अन्याय के बावजूद चुप है और सत्ता बेशर्म. पवित्र प्रतीकों को लोग ब्रांड की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, अपने अपने फायदे के लिए..और आम जन को नहीं है ,आज़ादी अपनी बात रखने की, उनके बनाये शर्तों पर भी:-

    “शुद्र का प्रवेश
    वर्जित क्यों है
    तुम्हारे मंदिरों में?
    तुम तो करते हो
    इंसानियत की बात”

    और फिर:-
    “बहुत है सवाल
    जवाब नही मिलता”

  11. ANITA SINGH says:

    बहुत गहरा चिंतन है आपका…हमारे आस-पास जो घट रहा है…बड़ी संवेदनशील नज़र उसपर…आपकी कविताओं से हर कोई खुद को जुड़ा हुआ पाता है…आपकी हर बात दिल को छूती है…कई बार झकझोरती भी है…आह निकल जाती है और वाह भी..बस यूँ ही लिखते रहिये दुआ करते हैं….आपकी सोच के लिए साधुवाद नित्यानंद जी..:!)

  12. Sanjay says:

    thappd se drrr nhii lgta saahab cartooon se lgTa hai!!!

  13. amandeep says:

    sundr aur vicharoddhvelit kavitayen ,”jo khde hain paani me” marmik vishay ko chhua hai aapne …”fir bhi hme kyon nhi hota vishvaas” bdi hi sundr rchna hai nitya G…MNDIR bnane vale ko hi mndir me prvesh vrjitt kyon??

  14. deepamn says:

    sundr aur vicharoddhvelit kavitayen ,”jo khde hain paani me” marmik vishay ko chhua hai aapne …”fir bhi hme kyon nhi hota vishvaas” bdi hi sundr rchna hai nitya G…MNDIR bnane vale ko hi mndir me prvesh vrjitt kyon??

  15. sundar 'srijan' says:

    सभी कविताएं सामयिक,कविताओं में अच्छी राजनीतिक सूझबूझ |’ अघोरी’ कविता औसत और पारंपरिक परिपाटी पर , कवि को बधाई,आपका आभार !

  16. आभार ,आप सभी मित्रों का हौसला अफजाई के लिए ..

  17. Shekhar says:

    Sarthak kavitayen

  18. prachi says:

    sahi h

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