दो ग़ज़लें : प्राण शर्मा

ब्रिटेन में बसे भारतीय मूल के हिन्‍दी लेखक प्राण शर्मा की दो गजलें-

1.

रहके अकेला इस दुनिया में करना सब कुछ हासिल प्यारे
मैं  ही जानू  कितना ज़्यादा  होता  है ये  मुश्किल प्यारे

प्यारे-प्यारे,  न्यारे-न्यारे  खेल-तमाशे सब के सब हैं
आ कि ज़रा तुझको दिखलाऊँ दिल वालों की महफ़िल प्यारे

मोह नहीं जीवन का तुझको, मान लिया है मैंने लेकिन
दरिया में हर डूबने वाला चिल्लाता है साहिल प्यारे

कुछ तो चलो तुझको अनजानी राहों की पहचान हुई है
कैसा रंज, निराशा कैसी पा न सका जो मंजिल प्यारे

सबकी बातें सुनने वाले अपने दिल की बात कभी सुन
तेरी खैर मनाने वाला तेरा अपना है दिल  प्यारे

कुछ तो कर महसूस खुशी को कुछ तो कर महसूस तसल्ली
कुछ तो आये मुँह पर रौनक कुछ तो हो दिल झिलमिल प्यारे

तेरे-मेरे रिश्ते-नाते ‘प्राण’  भला क्यों सारे टूटें
माना, तू मेरे नाकाबिल,  मैं तेरे नाकाबिल प्यारे

2.

दोस्ती  यूँ  भी तेरी  हम  तो निभायेंगे
मानोगे जब तक नहीं तुझको मनायेंगे

सुनते हैं,  बह जाती है सब मैल नफ़रत की
प्यार की गंगा में हम खुल कर नहायेंगे

कुछ भलाई जागी है हम में भी ए यारो
पंछियों को हम भी अब दाने खिलायेंगे

क्या हुआ जो बारिशों में ढह गयी यारो
राम  ने  चाहा  कुटी  फिर  से  बनायेंगे

हम फ़क़ीरों का ठिकाना हर जगह ही है
शहर से निकले तो जंगल ही बसायेंगे

आप  जीवन  में  हमारे  आके  तो देखें
आपको दिल में कभी सर पर बिठायेंगे

एक से रहते नहीं दिन ‘प्राण’  जीवन के
आज रोते हैं अगर कल मुस्करायेंगे

15 comments on “दो ग़ज़लें : प्राण शर्मा

  1. Dr.preet arora says:

    बहुत खूबसूरत .प्राण जी की गजलों और लघुकथाओं में उनका कोई सानी नहीं है .बहुत ही उम्दा रचनाएँ बधाई

  2. binu bhatnagar says:

    रहके अकेला इस दुनिया में करना सब कुछ हासिल प्यारे
    मैं ही जानू कितना ज़्यादा होता है ये मुश्किल प्यारे

    आप जीवन में हमारे आके तो देखें
    आपको दिल में कभी सर पर बिठायेंगे

    पूरी ग़ज़ले बहुत सुन्दर हैं ऊपर लिखीं पंक्तियाँ सबसे सुन्दर लगीं

  3. vandana gupta says:

    हके अकेला इस दुनिया में करना सब कुछ हासिल प्यारे
    मैं ही जानू कितना ज़्यादा होता है ये मुश्किल प्यारे

    वाह वाह …………गज़ब की गज़ल है……………दिल को छू गयी।

  4. दोनों गज़ल बहुत अच्छे लगे. सभी शेर बहुत अर्थपूर्ण…

    रहके अकेला इस दुनिया में करना सब कुछ हासिल प्यारे
    मैं ही जानू कितना ज़्यादा होता है ये मुश्किल प्यारे

    बधाई स्वीकारें.

  5. तिलक राज कपूर says:

    बहुत खूबसूरत ग़ज़लें।

  6. Mahendra Dawesar says:

    हमेशा की तरह दोनों ही ग़ज़लें अत्यंत सुन्दर और प्रेर्नाजनक हैं.

    प्राण जी को बढायी

    महेंद्र दवेसर.

  7. दोनों गज़ले बहुत उम्दा रहीं…वाह!!

  8. digamber says:

    कुछ तो कर महसूस खुशी को कुछ तो कर महसूस तसल्ली
    कुछ तो आये मुँह पर रौनक कुछ तो हो दिल झिलमिल प्यारे

    दोस्ती यूँ भी तेरी हम तो निभायेंगे
    मानोगे जब तक नहीं तुझको मनायेंगे

    प्राण साहब की दोनों ग़ज़लें अलग अंदाज़ लिए … मन में सीधे उतरने वाली हैं … सीधे सादे शब्दों में प्रभावी और दूर की बात कहना उनकी खासियत है … बहुत उम्दा ग़ज़लें …

  9. ashok andre says:

    priya bhai Pran Sharma jee aapki dono gajlon ne gehra prabhav chhoda hai,itni achchhi gajlo ke liye badhai.

  10. प्राण जी की ग़ज़लों का सानी नहीं. कलम से उतरकर दिल पर काबिज़ हो जाती हैं. बधाई.

  11. Neeraj says:

    मोह नहीं जीवन का तुझको, मान लिया है मैंने लेकिन
    दरिया में हर डूबने वाला चिल्लाता है साहिल प्यारे
    ***
    कुछ भलाई जागी है हम में भी ए यारो
    पंछियों को हम भी अब दाने खिलायेंगे

    सीधी ज़बान में बातें करती हुई प्राण साहब की ये ग़ज़लें बेजोड़ हैं…ऐसी शायरी करना कितना मुश्किल काम होता है ये कोई मुझसे पूछे…इन लाजवाब ग़ज़लों के लिए प्राण साहब को ढेरों दाद…

    नीरज

  12. kewal tiwari says:

    bahut umda rachna

  13. Sharadkumar vedpathak says:

    Jindagiki sahi taswir batanewali in gazalonke liye meri tarafse hardik badhai sweekar karen.

  14. krishan says:

    bhai anuraag itni achhi gazal ke liye dhanywaad




  15. नव संवत् का रवि नवल, दे स्नेहिल संस्पर्श !
    पल प्रतिपल हो हर्षमय, पथ पथ पर उत्कर्ष !!



    आप जीवन में हमारे आके तो देखें
    आपको दिल में कभी सर पर बिठायेंगे

    वाऽह ! क्या बात है !
    आदरणीय प्राण शर्मा जी का आशीर्वाद और स्नेह मुझे मिलता रहता है …
    बेहतरीन रचनाकार होने के साथ बेहतरीन इंसान हैं …

    नेट-भ्रमण करते हुए संयोगवश पहली बार पहुंचा हूं यहां
    लेखकमंच को बहुत बधाई !

    समस्त लेखकमंच परिवार को नव संवत्सर २०७० की बहुत बहुत बधाई !
    हार्दिक शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं…

    -राजेन्द्र स्वर्णकार


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