चरित्रहीन परिवेश की कहानियां: स्वयं प्रकाश

नई दिल्ली: हमारे चरित्रहीन समय में बड़े चरित्रों का बनना बंद हो गया है इसलिए परिवेश ने अब चरित्रों का स्थान ले लिया है। ‘छबीला रंगबाज का शहर’ में ऐसे ही चरित्रहीन परिवेश की कहानियां हैं, जहाँ कथाकार वास्तविक पात्रों की काल्पनिक कहानियां दिखा रहा है। सुप्रसिद्ध कथाकार स्वयं प्रकाश ने साहित्य अकादेमी सभागार में 16 सि‍तंबर को युवा कथाकार प्रवीण कुमार के पहले कहानी संग्रह ‘छबीला रंगबाज का शहर’ का लोकार्पण करते हुए कहा कि आजकल कहानीकारों की उम्र कम होने लगी है। ऐसे में नए कहानीकार के लिए सबसे जरूरी शुभकामना यही होगी कि हम उनसे लम्बी सक्रियता की अपेक्षा करें।

युवा आलोचक संजीव कुमार ने ‘छबीला रंगबाज का शहर’ को यथार्थ के गढ़े जाने का पूरा कारोबार बताने वाला संग्रह बताया। उन्होंने कहा कि खबरों के निर्माण की कार्यशाला का हिस्सा हो जाने की इन कहानियों को पढ़ना विचलित करने वाला अनुभव है, जहाँ नए ढंग से कहन की वापसी हो रही है। संजीव कुमार ने कहा कि संयोग से वे इन कहानियों की रचना प्रक्रिया के भी साक्षी रहे हैं। ‘छबीला रंगबाज का शहर’ का एक वाक्य ‘हर जगह यही हो रहा है’ वस्तुत: आरा शहर ही नहीं, हमारे समूचे परिदृश्य की बात कहता है।

विख्यात पत्रकार और ‘जनसत्ता’ के पूर्व सम्पादक ओम थानवी ने प्रवीण कुमार की कहानियों की रचना शैली में नाटकीय तत्वों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये ऐसी कहानियां हैं, जहाँ चीज़ें मजे-मजे में बताई जा रही हैं, लेकिन कहने का ढंग अलहदा है। कहानी का यह नया ढांचा है, जहाँ यथार्थ वास्तव में ‘उघाड़ा’ हो रहा है।

प्रसिद्ध आलोचक और दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व सम कुलपति प्रोफेसर सुधीश पचौरी ने कहा कि प्रवीण कुमार की कहानियाँ विकास की आड़ में हो रही लूटखोरी को दिखाती हैं और विराट लुम्पेनाइजेशन का नया पाठ प्रस्तुत करती हैं। उन्‍होंने लुम्पेनाइजेशन को कहानी का विषय बनाकर बिल्कुल नए ढंग से लिखने के लिए प्रवीण कुमार को बधाई देते हुए कहा कि जिस प्रसन्न गद्य में वे लिखते हैं, वह सचमुच ‘रीडरली टेक्स्ट’ कहा जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘छबीला रंगबाज का शहर’ में कथाकार विडम्बनामूलकता को नष्ट करते चले हैं और यही बात उन्हें सिविल सोसायटी का पक्षधर बनाती है।

इससे पहले संयोजन कर रही डॉ उमा राग ने अतिथियों का परिचय दिया और कथाकार प्रवीण कुमार ने ‘छबीला रंगबाज का शहर’ संग्रह के कुछ अंशों का पाठ कि‍या। संग्रह के प्रकाशक राजपाल एण्ड सन्ज़ की तरफ से मीरा जौहरी ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि नयी रचनाशीलता के लिए हिंदी का सबसे पुराना  प्रतिष्ठित प्रकाशन सदैव स्वागत करता है।

आयोजन में विचारक प्रो अपूर्वानंद, कवि अनामिका, कथाकार प्रियदर्शन, पाखी सम्पादक प्रेम भारद्वाज, बनास जन के सम्पादक पल्लव, हिन्दू कालेज के आचार्य डॉ रामेश्वर राय, डॉ रचना सिंह, डॉ मुन्ना कुमार पांडेय, डॉ अमितेश कुमार, डॉ नीरज कुमार सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और युवा पाठक उपस्थित थे।

प्रस्‍तुति‍: प्रणव जौहरी

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