क्रिकेट दस सुख

क्रिकेट खेलिए। खूब खेलिए। बल्ला उठाइए। न उठाइए। सब चलेगा। निंदा रस बेकार। सब सुख सागर।
पहला सुख : दूसरे टेंशन में, आप फ्री। कई रिकॉर्ड बना तो चुके हैं। विश्व के महान खिलाडिय़ों में शुमार हैं। फिर किस बात की चिंता? बाहर का रास्ता दिखाने की किसकी हिम्मत? लोग करें चिंता, सचिन कितना स्कोर खड़ा करेगा? हरभजन कितने विकेट चटगाएगा? नहीं किया स्कोर खड़ा। दूसरे को नहीं भेजा पैवेलियन। आप चले आए। तो क्या हुआ? दुनिया आनी-जानी। यह कोई कुंभ का मेला है, जो बारह साल बाद आएगा। जल्द होगा दूसरा टूर्नामेंट। फिर देखा जाएगा।
दूसरा सुख : बेतहाशा कमाई। खेल और पुरस्कार से कमाई। बड़ी-बड़ी कंपनियों के विज्ञापन करने से कमाई। बल्ले पर स्टिकर लगाने से भी सालाना करोड़ों की कमाई। और भैया, सट्टा तो बोनस है। उसके बारे में क्या कहें?
तीसरा सुख : पुराने रिकॉर्ड की अहमियत। खिलाड़ी कई मैचों में लगातार फुस्स। डोंट वरी। क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में धैर्य है। हम इंतजार करेंगे। हर सवाल का एक जवाब। खिलाड़ी की पुरानी परफॉरमेंस। लगातार अच्छे प्रदर्शन की जरूररत नहीं। बीच-बीच में जलवे दिखाना काफी है। आलोचक चुप और प्रशंसक खुश।
चौथा सुख : सेफ कैरियर। चले, तो योग्यता का कमाल। नहीं चले, तो क्रिकेट बाइचांस। खेलो, जमकर खेलो। तब तक खेलो, जब तक लोग न बोल पड़ें आउट!
पांचवां सुख : रिटायरमेंट के बाद भी रोजी के कई अवसर। चैनल में एक्सपर्ट का काम पक्का। फिल्म और राजनीति में धाक।
छठा सुख : जैंटलमैन। पढ़े-लिखे हो, तो इंजीनियर। नहीं पढ़ सके तो होटल-रेस्टोरेंट के मालिक। फिल्म अभिनेत्री से आंखें चार। पिच पर नहीं चल सके, तो क्या, रैंप पर चलेंगे।
सातवां सुख : हर किसी की जुबान पर आपका ही नाम। बच्चे-बच्चे में क्रिकेटर बनने की चाह।
आठवां सुख : पूरे देश को आपकी चिंता। आपको हुआ जुकाम। पूरे देश को आने लगेगी छींक।
नवां सुख : संसद में बहस। नेताओं में क्रेज। राजनीति की पिच तैयार।0 दसवां सुख : अगर बुद्धू घर को लौट ही आए, तो बुद्ध थोड़े कहलाएगा। बुद्ध तो वे बने, जो आपके सुख-दु:ख से दु:खी हैं और अपना खून जला रहे हैं।


3 comments on “क्रिकेट दस सुख

  1. ojaskar says:

    बहुत अच्छा

  2. sumit says:

    accha hai ………..ye ek such hai jo cricket se juda hua hai…..hum sabko ye such manna chaiye

  3. BIJAY says:

    काश! हम भी क्रिकेटर होते तो की-बोर्ड पर फालतू की अंगुली नहीं मार रहे होते। यह काश शब्द बड़ा खतरनाक है। खैर, क्रिकेट नहीं तो लेखन ही सही।

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