केदारनाथ सिंह को शलाका सम्मान

नई दिल्ली : तीसरे सप्तक के कवि, आलोचक और चिंतक केदारनाथ सिंह को दिल्ली की हिंदी अकादमी का सर्वोच्च शलाका सम्मान देने की घोषणा की गई है।   

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के ग्राम चकिया में 7 जुलाई, 1934 को जन्मे केदारनाथ सिंह ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से अध्ययन किया और 1964 में वहीं से पीएचडी की। उनका पहला कविता संग्रह ‘अभी बिल्कुल नहीं’ 1960 में प्रकाशित हुआ और इसी साल प्रकाशित ‘तीसरा सप्तक’ में भी उनकी कविताएं शामिल की गईं। उनके प्रमुख कविता संगहों में ‘जमीन पक रही है’, ‘यहां से देखो’, ‘अकाल में सारस’, ‘उत्तर कबीर और अन्य कविताएं’ और ‘बाघ’ प्रमुख हैं। आलोचनात्मक कृतियां ‘कल्पना और छायावाद’, ‘आधुनिक हिंदी कविता में बिंब विधान’ और ‘मेरे समय के शब्द’ हैं। उनकी कविताओं के अंग्रेजी, स्पेनिश, रूसी, जर्मन, हंगेरियन और देश की प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित हुए हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री और अकादमी की अध्यक्ष शीला दीक्षित के मुख्य आतिथ्य में प्रख्यात बांग्ला लेखिका महाश्वेता देवी 23 मार्च को केदारनाथ सिंह को यह सम्मान प्रदान करेंगी। सम्मान के रूप में दो लाख रुपए, प्रतीक चिह्न और शॉल प्रदान किया जाएगा।



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