कथाकार अरुण प्रकाश को जसम की श्रद्धांजलि

नई दि‍ल्‍ली : हिन्‍दी के वरिष्ठ कथाकार अरुण प्रकाश का 18 जून, 2012  को दिल्ली के पटेल चेस्ट अस्पताल में लम्‍बी बीमारी के बाद निधन हो गया। बिहार के बेगूसराय में 22 फरवरी 1948 को जन्में अरुण प्रकाश अपने प्रगतिशील-जनवादी लेखन के लिये हमेशा प्रासंगिक बने रहेंगे। ‘भैया एक्सप्रेस’, ‘जल प्रांतर’, ‘मझधार किनारे’, ‘लाखों के बोल सहे’, ‘विषम राग’ और ‘स्वप्न घर’ जैसे कहानी संग्रहों के लेखक अरुण प्रकाश का उपन्यास ‘कोंपल  कथा’ और कविता संकलन ‘रात के बारे में’ भी चर्चित रहे। रोजगार के पलायन करने वाले बिहारी मजदूरों के जीवन संघर्ष पर केन्‍द्रि‍त उनकी कहानी ‘भैया एक्सप्रेस’ हो या उत्तर बिहार में बाढ़ की विभीषिका के बहाने पूरे समाज और व्यवस्था के अंतविर्रोधों और उसमें मौजूद द्वंद्वों को अभिव्यक्त करने वाली कहानी ‘जल प्रांतर’ हो, ये उनके प्रतिबद्ध लेखन की मिसाल हैं। उनकी रचनाओं में आम मेहनतकश लोगों के दुख-दर्द और समस्याओं को अभिव्यक्ति मिली।

सत्तर के तूफानी दशक में जिन नौजवान लेखकों ने साहित्य को सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन का माध्यम बनाया, अरुण प्रकाश उनमें से एक थे। बिहार में नवजनवादी सांस्कृतिक मोर्चा के गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वह जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय परिषद में भी रहे।

अरुण प्रकाश कुछ वर्षों तक अध्यापन और पत्रकारिता से जुड़े रहने के बाद स्वतंत्र लेखन और अनुवाद कार्य करते रहे। उन्होंने अंग्रेजी से हिन्‍दी में विभिन्न विषयों की आठ पुस्तकों का अनुवाद किया। वह ‘चंद्रकांता’ सहित कई धारावाहिकों, वृत्तचित्रों एवं टेलीफिल्मों से भी जुड़े रहे।

हाल के एक दशक में उन्होंने स्वयं को कथा समीक्षा और आलोचना के लिए समर्पित कर दिया था।  अरुण प्रकाश को हिन्दी  अकादमी का साहित्यकार सम्मान, रेणु पुरस्कार, दिनकर सम्मान, सुभाष चंद्र बोस कथा सम्मान और कृष्ण प्रताप स्मृति कथा पुरस्कार से नवाजा जा चुका था।

हाल के दिनों में उन्होंने साहित्य अकादमी की पत्रिका ‘समकालीन भारतीय साहित्य’ के कई अंकों का सम्‍पादन भी किया था। अरुण जी का असमय जाना हिन्दी साहित्य संसार की गहरी क्षति है। जन संस्कृति मंच की विनम्र श्रद्धांजलि!

(प्रणय कृष्ण, महासचिव जन संस्कृति मंच की ओर से जारी )



One comment on “कथाकार अरुण प्रकाश को जसम की श्रद्धांजलि

  1. विनम्र श्रद्धांजलि

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