कक्षा पहली के बच्चे : भास्कर चौधुरी

भास्कर चौधुरी

भास्कर चौधुरी

एक

आपने सुना कभी
किसी हिटलर को कहते
सुंदर है यह धरती
आओ इसे और सुंदर बनाएँ

कक्षा पहली के बच्चे
ऐसा हर रोज़ कहते हैं-
सुंदर है यह धरती
आओ इसे और सुंदर बनाएँ।

दो

कक्षा पहली के बच्चे ने
थाम रखा है सर
हथेलियों के बीच
बच्चे के गाल
महसूस कर रहे हैं
उंगलियों का दबाव
और ठोढ़ी टिकी हुई है
हथेलियों की जड़ों पर
कक्षा पहली के बच्चे ने
थाम रखा है सर
जैसे थामा हो पृथ्वी
हथेलियों के बीच !

तीन

कक्षा पहली के बच्चे
नहीं जानते सौदा
किस चिड़िया का नाम होता है
वे नहीं समझते गिव एंड टेक का अर्थ
कक्षा पहली के बच्चे
हमारे थोड़े से समय के बदले
ढेर सारा प्यार दे देते हैं।

चार

कक्षा पहली के बच्चे
कहीं भी कभी भी
गाने लगते हैं जन गण मन…
जब चाहे
उनका मनकक्षा पहली के बच्चे
सुबह की प्रार्थना सभा में
पैर के अंगूठे से
धरती पर आड़ी-तिरछी लकीरें खींचते हैं
जब और लोग गाते हैं जन गण मन…

पाँच

बहुत दिनों के बाद
अपनी कक्षा से बाहर आए हैं
कक्षा पहली के बच्चे
जैसे अपने नीड़ों से निकलकर मेमनें
चल पड़ते हैं भेड़ों के साथ
उनसे सटकर
कक्षा पहली के बच्चे
अपनी टीचर जी के साथ
तितलियाँ पकड़ने का खेल खेल रहे हैं
बहुत दिनों के बाद
खिली है धूप
तो जैसे शामिल हो गई हो
चुपके से बच्चों की दूधिया खुशी में…
पहली कक्षा के बच्चे जैसे
बादलों के पीछे से
सूरज की तरह निकले
और छा गए
धूप की तरह पूरे मैदान में..

छः

कक्षा पहली के बच्चे
मायूस दिखते हैं जब
टॉयलेट के सामने
निकर आधी ऊपर चढ़ाए
बटन या हूक लगाने का
सफल-असफल प्रयास करते हैं
वे नहीं चाहते
कोई उन्हें देख ले नंगा
पहली कक्षा के बच्चे
अपनी टीचरजी से सटकर खड़े होते हैं
वे टीचरजी के होंठों को देखकर
और छूकर सीखते हैं-
‘आ’ आम का, ‘ए’ से एप्पल
‘औ’ से औरतकक्षा पहली के बच्चे
उनकी टीचरजी के ज़रा देर करते ही
खुद बन जाते हैं टीचर
चॉक पकड़कर श्यामपट पर
बनाते आदमी मकान चिड़िया तितली
छड़ी पकड़कर नन्हें हाथों में
खेलने लगते मैडम-मैडम
कक्षा पहली में
कम अज कम पाँच बच्चे होते
कक्षा के मॉनीटर….कक्षा पहली के बच्चे
केवल अपने टीचर को पहचानते हैं
वे उन्हें ‘टीचरजी’ कहकर पुकारते हैं
टीचरजी के मुंह पर उंगली रखते ही
अपने मुंह पर उंगलियाँ रख लेते हैं
और इशारा होते ही उनका
नाचने लग जाते हैंकक्षा पहली के बच्चे
समझते हैं प्यार की भाषा !!

सात

मेरे सपनों में आते हैं
कक्षा पहली के बच्चे
आते हैं और गुदगुदाने लगते है
पत्नी कहती है
हँसता हूँ मैं नींद में…।

आठ

दौड़ता रहता हूँ मैं
बड़ी कक्षाओं के बच्चों के बीच
कि जैसे एक डर सा लगने लगा है
इन दिनों बड़ी कक्षाओं के बच्चों से
ज़रा सी देर हुई नहीं कि
घटी कोई दुर्घटना
कि जैसे बच्चे बच्चे नहीं रहे
बड़ी कक्षाओं के…

कि जैसे-
बड़ी कक्षाओं के बीच
झूलता रहता हूँ
दोनों हाथों के बल
हवा में लटके होते हैं
दोनों पैर…
कि जैसे-
फुरसत ही नहीं
सांस लेने की भी …

पर मिलते ही
पहली कक्षा के बच्चों को
सांसों को इत्मिनान आ जाता है।

नौ

कक्षा पहली के बच्चे
दौड़ रहे हैं/कूद रहे हैं
मचल रहे हैं
गिर रहे हैं/उठ रहे हैं
उड़ रहे हैं
कक्षा पहली के बच्चे
गा रहे हैं कोई गीत
समूह में नाच रहे हैं
खेल रहे हैं कित-कित
लूट रहे हैं मज़ा
हल्की-हल्की बारिश में भीगने का

कक्षा पहली के बच्चे को भूख लगी है
वे मिड डे मील खा रहे हैं…

कक्षा पहली के बच्चे
तड़प रहे हैं
पेट पकड़-पकड़ कर
उल्टियाँ कर रहे हैं
पास पड़ी हुई
खुली हुई किताबे है
हवा में पन्ने फड़फड़ा रहे हैं…

दस

कक्षा पहली का बच्चा
चलता है सड़क पर ज
सड़क पर नहीं होती उसकी आँखें
वह देखता है
फूल पत्ती तितली आसमान
बादल बिजली बरसात गाय और गोबर
चीटियाँ पिल्ले और कुत्ते और कौवें धूल धुआ
तेज रफ्तार गाड़ियाँ
बाइकों का शोर और
रिक्‍शे की पों पों
भले लगते हैं
कक्षा पहली के बच्चे को
पहली कक्षा का बच्चा
छूता है जब कागज़ की नाव
उंगलियों के पोरों से
तो वह चलने लगती है बेपाँव
पाँव की ठोकर लगते ही
छोटा गोलाकार पत्थर
फुटबाल बन जाता है
क्क्षा पहली का बच्चा नहीं होता

सड़क पर कभी अकेला-उदास!!

ग्यारह

वह बच्चा
कक्षा पहली का
पहुँच नहीं पाया
अपनी कक्षा में
अब तक
दरअसल
खोज रही है
उसकी आँखें
धरती पर कोई नई चीज़
जो काम की हो उसके
मसलन
चकमक पत्थर
लकड़ी का एक
अदद टुकड़ा-
चिकना और बेलनाकार
सुनहली मक पत्ती !!

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