आरसी चौहान की तीन कवि‍तायें

आरसी चौहान

चरौवाँ,  बलिया,  उत्‍तर प्रदेश में 08 मार्च, 1979 को जन्‍में युवा कवि‍ आरसी चौहान के गीत, कवि‍ता, लेख, समीक्षा आदि‍ का वि‍भि‍न्‍न पत्र-पत्रि‍काओं में प्रकाशन के अलावा आकाशवाणी से प्रसारण हो चुका है। उनकी तीन कवि‍तायें-

बेर का पेड़

मेरा बचपन
खरगोश के बाल की तरह
नहीं रहा मुलायम
न ही कछुवे की पीठ की तरह
कठोर ही

हाँ मेरा बचपन
जरूर गुजरा है
मुर्दहिया, भीटा और
मोती बाबा की बारी में
बीनते हुए महुआ, आम
और जामुन

दादी बताती थीं
इन बागीचों में
ठाढ़ दोपहरिया में
घूमते हैं भूत-प्रेत
भेष बदल-बदल
और पकड़ने पर
छोड़ते नहीं महिनों

कथा किंवदंतियों से गुजरते
आखिर पहुँच ही जाते हम
खेत-खलिहान लाँघते बागीचे
दादी की बातों को करते अनसुना

आज स्मृतियों के कैनवास पर
अचानक उभर आया है
एक बेर का पेड़
जिसके नीचे गुजरा है
मेरे बचपन का कुछ अंश
स्कूल की छुट्टी के बाद
पेड के नीचे
टकटकी लगाये नेपते रहते
किसी बेर के गिरने की या
चलाते अंधाधुंध ढेला, लबदा

कहीं का ढेला
कहीं का बेर
फिर लूटने का उपक्रम
यहाँ बेर मारने वाला नहीं
बल्कि लूटने वाला होता विजयी
कई बार तो होश ही नहीं रहता
कि सिर पर
कितने बेर गिरे
या किधर से आ लगे
ढेला या लबदा

आज कविता में ही
बता रहा हूँ कि मुझे एक बार
लगा था ढेला सिर पर टन्न-सा
और उग आया था गुमड़
या बन गया था ढेला-सा दूसरा
बेर के खट्टे-मीठे फल के आगे
सब फीका रहा भाई
यह बात आज तक
माँ-बाप को नहीं बताई
हाँ, वे इस कविता को
पढ़ने के बाद ही
जान पायेंगे कि बचपन में
लगा था बेर के चक्कर में
मुझे एक ढेला
खट्टा, चटपटा और
पता नहीं कैसा-कैसा
और अब यह कि
हमारे बच्चों को तो
ढेला लगने पर भी
नहीं मिलता बेर
जबसे फैला लिया है बाजार
बहेलिया वाली कबूतरी जाल
जमीन से आसमान तक एकछत्र।

पहाड़

हम ऐसे ही थोडे बने हैं पहाड़
हमने न जाने कितने हिमयुग देखे
कितने ज्वालामुखी
और कितने झेले भूकम्‍प
न जाने कितने-कितने
युगों चरणों से
गुजरे हैं हमारे पुरखे
हमारे कई पुरखे
अरावली की तरह
पड़े हैं मरणासन्न तो
उनकी संतानें
हिमालय की तरह खड़ी हैं
हाथ में विश्व की सबसे ऊँची
चोटी का झण्‍डा उठाये।

बारिश के बाद
नहाये हुए बच्चों की तरह
लगने वाले पहाड़
खून पसीना एक कर
बहाये हैं निर्मल पवित्र नदियाँ
जिनकी कल-कल ध्वनि
की सुर ताल से
झंकृत है भू-लोक, स्वर्ग
एक साथ।

अब सोचता हूँ
अपने पुरखों के अतीत
व अपने वर्तमान की
किसी छोटी चूक को कि
कहाँ विला गये हैं
सितारों की तरह दिखने वाले
पहाड़ी गाँव
जिनकी ढहती इमारतों व
खण्डहरों में बाजार
अपना नुकीला पंजा धंसाए
इतरा रहा है शहर में
और इधर पहाड़ी गाँवों के
खून की लकीर
कोमल घास में
फैल रही है लगातार ।

नथुनिया फुआ

ठेठ भोजपुरी की बुनावट में
घड़रोज की तरह कूदता
पूरी पृथ्वी को
मंच बना
गोंडऊ नाच का नायक-                                                                                                                            ‘नथुनिया फुआ’
कब लरझू भाई से
नथुनिया फुआ बना
हमें भी मालूम नहीं भाई !
हाँ, वह अपने अकाट्य तर्कों के
चाकू से चीर फाड़कर
कब उतरा हमारे मन में
हुडके के थाप और
भभकते ढीबरी के लय-ताल पर
कि पूछो मत रे भाई !
उसने नहीं छोड़ा अपने गीतों में
किसी  सेठ-साहूकार
राजा-परजा का काला अध्याय
जो डूबे रहे मांस के बाजार में आकंठ
और ओढे रहे आडम्‍बर का
झक्क सफेद लिबास
माना कि उसने नहीं दी प्रस्तुति‍
थियेटर में कभी
न रहा कभी पुरस्कारों की
फेहरिस्त में शामिल
चाहता तो जुगाड़ लगाकर
बिता सकता था
बाल-बच्चों सहित
राज प्रसादों में अपनी जिन्‍दगी के आखिरी दिन
पर ठहरा वह निपट गँवार
गँवार नहीं तो और क्या कहूँ उसको
लेकिन वाह रे नथुनिया फुआ
जब तक रहे तुम जीवित
कभी झुके नहीं हुक्मरानों के आगे
और भरते रहे साँस
गोंडऊ नाच के फेफडों में अनवरत
जबकि…
आज तुम्हारे देखे नाच के कई दर्शक
ऊँचे ओहदे पर पहुँचने के बाद
झुका लेते हैं सिर
और हो जाते शर्मशार …।

45 comments on “आरसी चौहान की तीन कवि‍तायें

  1. बहुत सुंदर कवितायेँ ………….. बधाई

  2. pradeep malwa says:

    हमारे कई पुरखे
    अरावली की तरह
    पड़े हैं मरणासन्न तो
    उनकी संतानें
    हिमालय की तरह खड़ी हैं
    हाथ में विश्व की सबसे ऊँची
    चोटी का झण्‍डा उठाये।

    अच्छी कविताएं । बहुत बहुत बधाई।

  3. reena chauhan says:

    कविताएं अपने कथ्य और शिल्प में बेजोड़ तो हैं ही साथ ही अलग अलग पृष्ठभूमि के बावजूद ध्यानाकर्षित करती हैं। सार्थक कविताओ के लिए कवि को बहुत बहुत हार्दिक बधाई।

  4. ajay kumar says:

    अच्छी कविताएं बधाई।

  5. 'manohar chamoli 'manu says:

    kya baat hai…! वाह ! कवितावों के बहाने ही sahi आपसे मुलाक़ात तो हुई..

  6. jabbar hussain says:

    अच्छी कविताएं पढवाने के लिये कवि व संपादक को बहुत बहुत बधाई।

  7. mukesh kumar dadwal says:

    हम सौभाग्यशाली है कि बलिया के ददरी मेले में उन्हें सुनने का हमें एक बार अवसर मिला था…आपके ब्लाग पर उनकी कविताओ को पढ़कर एक बार फिर मन गदगद हो गया.

  8. Anjani Kumar Gupta says:

    Godau nanch ka astitva khatre me par chuka hai, Isko Samaj ke samne apne kaviyao ke madyam se Arsi Chauhan ji Ka prayas Sarahniy hai Aur Aarsi ko ham bahut bahut Dhanyabad dete hai ki Modern Yug me v Godau nanch ka utna hi mahatav hai.

  9. Ajeet Kumar Jain says:

    Aarsi Chauhan ki kavitayo ne mujhe bachpan ki yad dila gai. Aj k sahrikaran k yug me Chauhan ji ne Ber ke ped ke mahatav ko batana sarahniy kadam h.

  10. mahesh chandra punetha says:

    Aarsi bhayi ki kavitaon main lok ki khusaboo unhen ek alag pahachan pradan karati hain. unake apane anchal se pathak ka parichay karati hain. aasha hai lok ka yah roop aane wali kavitaon main or adhik sanshlishtata ke sath aayega……badhayi dono ko.

  11. Chiranjilal Bagra says:

    Aarsi Chauhan ki teeno kavitaye mujhe kafi achhi lagi, inki shaili ne mujhe inki puri kavitayo ko padne par majbur kiya. kafi achhi kavitaye hai

  12. Minu Gupta says:

    Aarsi Bhaiya ki kavitaye mujhe gaon ki yad dila gai. bahut hi acchi kavita hai apki, aap aise hi kavita likhte rahe.

  13. anil chauhan says:

    behtarin kavitaen.

  14. anil chauhan says:

    बहुत खूब, बधाई

  15. Dr. Shailesh Veer says:

    kavi ARSI CHOUHAN ki ye kavitayen nischit roop se samaj ko disha pradan karti hain…………bahut kuchh sochne ke liye vivash karti hain………..kai baar to aisa lagata hai ki ateet samne nartan kar raha hai.sundar aur utkrisht kavitaon ke liye kavi ko kotik badhaiyan.

  16. dr.abhay says:

    जीवन से जुडी कविता . बधाई …

  17. raj chauhan says:

    “ber ka ped” kavita padhne ke baad main kuch der tak apne unhi dino ko yad krta rha jab hume v dadi usi tarah se bhoot k bare me btati thi……aur muje mere bachpan ke din yaad aa gaye …..

  18. raj chauhan says:

    bahut bahut badhai ho aapko …..aal the poems are nice and of deep imagination …..aise hi likhte rahiye….

  19. puravai says:

    सुंदर कवितायेँ ………….. बधाई

  20. anwar suhail says:

    Samay saapeksh kavitaaen…badhai

  21. Vishal says:

    सुंदर कवितायेँ ………….. बधाई

  22. Simran says:

    yah kavitayen bahut achchhe se likhi gayi hain…..badhai

  23. Rita says:

    kavita bahut hi sundar hai…….badhai

  24. Vishal says:

    bahut hi achchhi kavitayen likhi gayi hain

  25. Manij says:

    shaandar kavitaen hain…..Aarsi Chauhan ko badhai

  26. Rajesh says:

    kafi achhi kavitayen hai …….khub khub badhai

  27. Rahul says:

    बेर का पेड़ kavita ne tomujhe bachpan ki yad dila di……….badhai

  28. Jyoti says:

    kavitayen bahut achchhi hai……..aapko badhai

  29. Ravindra says:

    aapki kavitaen bahut achchhi hai…….Badhai
    Kripya ek aur kavita likhe

  30. Pardeep Chauhan says:

    kavita padhne ke baad mai to bahut khush hua……badhai

  31. Suraj says:

    kavitaen bahut badhiya hai……….badhai

  32. Arvind Chauhan says:

    mai to ye kavitaen padkar bahut prasann hua…….badhai

  33. Harish says:

    yeh to kamaal ki kavitayen hai……..bahut badhai

  34. Satyam says:

    Kavitaen bahut achchhi hai…….badhai

  35. Shivam Kumar says:

    gajab ki kavitaen hai………badhai ho

  36. Brijesh says:

    hum Bihar me rahte the par ab Bihar ko chodkar Maharashtra me rahte hai. aaj 13 saal baad aapki kavita नथुनिया फुआ ne hume bihar ki yaad dila di…………hume apki kavitaen bahut achchhi lagi……..hum apko badhai dete hai

  37. Suresh says:

    बहुत खूब जीवन से जुडी कविता है…….बधाई

  38. Ranju says:

    pahad kavita se maine apne jeevan me haar na maanane ka nirnay kiya hai yah kavita hume aage badne ki raah dikhata hai ……….Aarsi Cahuhan ko bahut bahut badhai

  39. Raju says:

    badhai……..aapki kavitaen kamaal ki hai

  40. Kabir says:

    aapki teeno kavitaon ka jawab nahi hai………..badhai

  41. Kamlesh says:

    gajab ki aur achchhi kavitaen likhi hai aapne aapki kavitayon ka toh vakayi me jawab nahi

  42. chauhan jee bahut sundar dil ko sparsh karti hai aapki kavita.

  43. आपने अपनी कविता से एकदम से मेरे गांव को मेरे सामने खडा कर दिया । शुक्रिया ।

  44. बधाई!बहुत सुन्दर कविताएँ

  45. Abhishek Baid says:

    Aarsi Chauhan ki kavitaye kafi achhi lagi, Aaj ke bhagdaur ki duniye me log Gramin Pariwesh ko lagvag bhula hi diye hai, jo hamari sanskriti k liye khatre ki ghanti hai.

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