अज्ञेय की 100वीं जयंती पर व्याख्यान

जम्मू : चर्चित कवि हीरानंद सच्चिदानंद वात्सयायन अज्ञेय की 100वीं जयंती के अवसर पर 6 मार्च को शाश्वती की ओर से अज्ञेय स्मारक व्याख्यान-2010 का आयोजन किया गया। विषय था- बदलते सामाजिक परिवेश में व्यंग्य की भूमिका। केएल सहगल हॉल में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ अज्ञेय की रिकार्ड की गई कविताओं को सुनाकर हुआ।
मुख्य वक्ता व्यंग्य यात्रा के संपादक प्रेम जनमेजय ने कहा कि व्यंग्य समाज की बुराइयों पर चोट करता है। साहित्यकार विदू्रपताओं और विसंगतियों से समाज को मुक्ति दिलाने के लिए इसका इस्तेमाल ठीक वैसे की करता है, जैसे डाक्टर नश्तर लगाकर फोड़े की मवाद की सफाई करता है। उन्होंने कहा कि समाज को आईना दिखाने के लिए व्यंग्य जरूरी है। बदलते परिवेश में व्यंग्य का महत्व बढ़ता जा रहा है।
जम्मू यूनिवर्सिटी के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ओम प्रकाश ने हास्य और व्यंग्य के अंतर को स्पष्टï किया और अज्ञेय को महान व्यंग्यकार बताया। उन्होंने कहा कि टूटते रिश्तों के इस दौर में व्यंग्य और महत्वपूर्ण हो जाता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मुख्यधारा में साहित्य की कौन सी विधा है।
शाश्वती के संयोजक रमेश मेहता ने कार्यक्रम का संचालन किया। प्रोफेसर चंचल डोगरा ने अज्ञेय का जीवन परिचय पढ़ा। डॉक्टर निर्मल विनोद ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।



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